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डॉ. सुभाष शर्मा ने एनएफएल नंगल में ठेका कर्मचारियों के शोषण की जांच की मांग की

भारतीय जनता पार्टी के पंजाब प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सुभाष शर्मा ने केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर एनएफएल नंगल में ठेका कर्मचारियों के आर्थिक शोषण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ठेकेदार कर्मचारियों से वेतन देने के बाद पैसे वापस ले रहे हैं, जो उनके अधिकारों का उल्लंघन है। डॉ. शर्मा ने इस मामले में उचित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया है।
 

केंद्रीय श्रम मंत्री से हस्तक्षेप की अपील

नंगल: भारतीय जनता पार्टी के पंजाब प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सुभाष शर्मा ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल), नंगल में ठेकेदारों द्वारा कच्चे कर्मचारियों के आर्थिक शोषण के मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।


डॉ. शर्मा ने बताया कि उन्हें प्राप्त शिकायतों के अनुसार, कुछ ठेकेदार कर्मचारियों को वेतन देने के बाद हर कर्मचारी से 2,000 से 3,000 रुपये तक नकद वापस ले लेते हैं। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मेहनतकश कर्मचारियों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।


उन्होंने कहा कि ठेका कर्मचारियों की आजीविका उनके मेहनत और सीमित वेतन पर निर्भर करती है। यदि उनके वेतन के बाद उनसे जबरन पैसे वापस लिए जाते हैं, तो यह उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। किसी भी कर्मचारी को अपनी मेहनत की कमाई से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।


डॉ. शर्मा ने केंद्रीय श्रम मंत्री से अनुरोध किया है कि मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, संबंधित ठेकेदारों और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की जांच की जाए, और कर्मचारियों के बयान लेकर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाए। इसके साथ ही, शिकायत करने वाले कर्मचारियों की पहचान को गोपनीय रखने और उन्हें किसी भी प्रकार के दबाव या प्रताड़ना से बचाने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।


उन्होंने कहा कि एनएफएल जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रम में श्रम कानूनों और कर्मचारियों के अधिकारों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए और प्रभावित कर्मचारियों को उनका पूरा हक दिलाया जाना चाहिए।


डॉ. सुभाष शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि मेहनतकश कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करना और कार्यस्थल पर पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्रीय श्रम मंत्रालय इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगा।