डॉक्टरों के लिए यूनिक आईडी: फर्जी डॉक्टरों की पहचान में होगी आसानी
एनएमसी द्वारा नए नियमों की घोषणा
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने डॉक्टरों के लिए एक यूनिक आईडी नंबर लागू करने की योजना बनाई है। यह आईडी डॉक्टर की शिक्षा, पंजीकरण और पेशेवर जानकारी को एकत्रित करने में सहायक होगी। इसका मुख्य उद्देश्य सही जानकारी की पहचान करना और फर्जी डॉक्टरों की पहचान को आसान बनाना है। एनएमसी ने इस संबंध में नए मसौदा नियम तैयार किए हैं।
प्रत्येक डॉक्टर को मिलेगा यूनिक आईडी
हर पंजीकृत डॉक्टर को नेशनल मेडिकल रजिस्टर में एक यूनिक आईडी प्राप्त होगी। इस प्रस्ताव के तहत डॉक्टरों का एक राष्ट्रीय डिजिटल रिकॉर्ड भी बनाया जाएगा, जिसमें रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस की स्थिति और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानकारी शामिल होगी। यह रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा, जिसे मरीज और अस्पताल देख सकेंगे।
प्रैक्टिस लाइसेंस की वैधता
यह यूनिक आईडी पूरे देश में मान्य होगी, जिससे डॉक्टर कहीं भी इलाज कर सकेंगे। पहले से पंजीकृत डॉक्टरों को भी यह आईडी दी जाएगी, लेकिन इसके लिए उन्हें अपना रिकॉर्ड अपडेट करना होगा। मसौदा नियमों के अनुसार, प्रैक्टिस लाइसेंस की वैधता पांच साल होगी, जिसके बाद नवीनीकरण कराना आवश्यक होगा।
रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया
आईएमए के निदेशक अनिल नायक के अनुसार, एक यूनिफाइड पैन इंडिया रजिस्ट्रेशन पोर्टल विकसित किया जाएगा। जिन राज्यों में पहले से डिजिटल रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था है, उन्हें इस राष्ट्रीय पोर्टल से जोड़ा जाएगा।
पुराने डॉक्टरों के लिए यूआईडी
जो डॉक्टर पहले से इंडियन मेडिकल रजिस्टर या राज्य मेडिकल रजिस्टर में रजिस्टर्ड हैं, लेकिन उनके पास यूआईडी नहीं है, उनके लिए एक बार का अपडेट अभियान चलाया जाएगा। वे ईएमआरबी पोर्टल पर अपनी जानकारी अपडेट कर यूआईडी प्राप्त कर सकेंगे। इस प्रक्रिया के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
डॉक्टर की जानकारी का केंद्रीकरण
सेंट्रल रिकॉर्ड बनने के बाद डॉक्टर के खिलाफ हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई, लाइसेंस स्थिति समेत सभी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। यदि किसी डॉक्टर के खिलाफ शिकायत होती है, तो संबंधित राज्य चिकित्सा परिषद इसकी जांच करेगी।