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डोनाल्ड ट्रंप का ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने का ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को जारी रखने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक जहाजों को हुए नुकसान की भरपाई अमेरिका द्वारा जब्त की गई ईरानी संपत्तियों से की जाएगी। ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व पर बुरे इरादे रखने का आरोप लगाया और कहा कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने दिया जाएगा। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर रही है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं।
 

ट्रंप का ईरान के खिलाफ कड़ा रुख


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच, किसी भी वाणिज्यिक जहाज या कार्गो को हुए नुकसान की भरपाई अमेरिका द्वारा जब्त की गई ईरानी संपत्तियों से की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को जारी रखेगा।


ट्रंप ने अपने 'ट्रुथ सोशल' प्लेटफॉर्म पर लिखा, "जहाजों या कार्गो को हुए नुकसान का भुगतान ईरान के उन पैसों से किया जाएगा जो अमेरिका के नियंत्रण में हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि नुकसान बड़ा हो सकता है, लेकिन यह सही कदम है। यह बयान ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी जहाजों पर हमले के एक दिन बाद आया है, जिससे वैश्विक तेल की कीमतें लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।


ईरान की अरबों डॉलर की जब्त संपत्ति का मुद्दा लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का कारण रहा है। जून में हुए समझौते में इन संपत्तियों को जारी करने का उल्लेख था, लेकिन हाल के तनावों के कारण वह समझौता खत्म हो गया। ट्रंप ने तुरंत युद्धविराम की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि सैन्य दबाव बनाए रखना आवश्यक है।


पर्यावरण संरक्षण एजेंसी में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "हम ईरान के खिलाफ बहुत अच्छा कर रहे हैं।" उन्होंने ईरान के नेतृत्व पर बुरे इरादे रखने का आरोप लगाया और कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करने दिया जाएगा। यह तब कहा गया जब अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों पर लगातार 13वीं रात हमले किए।


अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने सोशल मीडिया पर कहा कि ताजा अभियान का उद्देश्य ईरान को जवाबदेह ठहराना और वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरे को कम करना था।


सेंटकॉम ने यह भी बताया कि हमले रात 9 बजे समाप्त हो गए। अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य कमान केंद्रों, ड्रोन स्टोरेज, संचार नेटवर्क और समुद्री क्षमताओं को निशाना बनाया।


ये हमले एक हफ्ते से चल रहे लगातार हवाई हमलों के बाद हुए हैं, जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले शुरू किए। अमेरिका ने इस जलमार्ग में ईरानी शिपिंग पर नौसैनिक नाकाबंदी भी लागू कर दी है।


इस टकराव ने अमेरिका में राजनीतिक मतभेद भी पैदा कर दिए हैं। अमेरिकी हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स ने कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने के प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। हालांकि, सीनेट में ऐसा प्रस्ताव पास नहीं हो सका। ट्रंप ने कहा कि ईरान बातचीत के लिए "तैयार नहीं" है और अमेरिका का पसंदीदा रास्ता लगातार हमले करना रहेगा।