डोनाल्ड ट्रंप का पाकिस्तान के साथ तेल डील पर बलूचिस्तान की प्रतिक्रिया
ट्रंप का विवादास्पद निर्णय
डोनाल्ड ट्रंप का एक हालिया निर्णय अमेरिका को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, जिसका अंदाजा शायद उन्हें भी नहीं है। यदि ऐसा होता, तो व्यापारिक राष्ट्रपति के रूप में अपनी छवि बनाने वाले ट्रंप पाकिस्तान से व्यापार बढ़ाने की उम्मीद नहीं करते। हाल ही में, ट्रंप ने पाकिस्तान और अमेरिका के बीच एक तेल डील की घोषणा की है, जिससे बलूचिस्तान के लोग बेहद नाराज हैं। इस डील का उद्देश्य पाकिस्तान के अंदर मौजूद प्राकृतिक संसाधनों, विशेषकर तेल, गैस और दुर्लभ खनिजों का दोहन करना है, जो मुख्य रूप से बलूचिस्तान में स्थित हैं। लेकिन इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि क्या ये संसाधन वास्तव में पाकिस्तान के हैं या बलूचिस्तान के, जो दशकों से अपनी स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ रहा है। बलूच लोगों ने स्पष्ट कर दिया है कि बलूचिस्तान की भूमि बिकने के लिए नहीं है।
बलूचिस्तान की कड़ी प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद बलूचिस्तान ने उन्हें कड़ी चेतावनी दी है। बलूचिस्तान ने ट्रंप को ऐसे धमकी दी है जैसे वे शहबाज शरीफ को धमकाते हैं। बलूचिस्तान ने भारत का समर्थन करते हुए ट्रंप को सार्वजनिक रूप से चुनौती दी है। दरअसल, जब भारत से व्यापारिक डील में बाधा आई, तो ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ एक नई डील की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वे पाकिस्तान के साथ मिलकर एक विशाल तेल भंडार विकसित करेंगे और प्राकृतिक संसाधनों की माइनिंग करेंगे। इस पर बलूचिस्तान भड़क उठा। बलूच एक्टिविस्ट मीर यार बलोच ने कहा कि ट्रंप की जानकारी सही है, लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि ये संसाधन पाकिस्तान के नहीं, बलूचिस्तान के हैं।
बलूच नेताओं की चेतावनी
बलूच नेता ने कहा कि वे अमेरिका, पाकिस्तान और चीन जैसे देशों को बलूचिस्तान में घुसने नहीं देंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि जिस तरह से चीन और पाकिस्तान को नुकसान हुआ है, उसी तरह अमेरिका को भी नुकसान होगा। पाकिस्तान और अमेरिका के बीच एक नया व्यापार समझौता हुआ है, जिसे पाकिस्तान ने ऐतिहासिक करार दिया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रंप का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह समझौता दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। ट्रंप ने इसे पाकिस्तान के विशाल तेल भंडार के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि यह समझौता दोनों देशों को मिलकर तेल भंडार विकसित करने की अनुमति देगा। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि ये भंडार कहां स्थित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान लंबे समय से अपने समुद्री तटों पर तेल और गैस संसाधनों की बात कर रहा है, लेकिन व्यावहारिक रूप से अब तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है।