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डोनाल्ड ट्रंप का विदेशी सहायता में कटौती का विवाद: क्या है इसके पीछे का सच?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 4.9 बिलियन डॉलर की विदेशी सहायता को रद्द करने का विवादास्पद निर्णय लिया है, जिससे अमेरिकी राजनीति में बजट और खर्च पर नई बहस छिड़ गई है। इस निर्णय का विरोध ट्रंप की अपनी पार्टी के कई सांसदों ने भी किया है। जानें कि किन कार्यक्रमों की फंडिंग रोकी गई है, संविधान इस पर क्या कहता है, और संयुक्त राष्ट्र और विपक्ष की प्रतिक्रिया क्या है। क्या यह कदम राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच संघर्ष को और बढ़ाएगा? पूरी जानकारी के लिए पढ़ें।
 

ट्रंप का बड़ा निर्णय

डोनाल्ड ट्रंप की विदेशी सहायता में कटौती: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 4.9 बिलियन डॉलर की विदेशी सहायता को रद्द करने का एक बड़ा और विवादास्पद निर्णय लिया है। इस कदम ने अमेरिका की राजनीति में बजट और खर्च पर नियंत्रण को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। खास बात यह है कि इस निर्णय का विरोध ट्रंप की अपनी रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसदों ने भी किया है, जिन्होंने इसे गैरकानूनी करार दिया है।


कौन से कार्यक्रम प्रभावित हुए?

फंडिंग में कटौती:
राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार रात अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के स्पीकर माइक जॉनसन को एक पत्र भेजकर बताया कि वे 15 अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों की फंडिंग को रोक रहे हैं। इनमें विदेशी सहायता, संयुक्त राष्ट्र की शांति रक्षा गतिविधियाँ और लोकतंत्र को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम शामिल हैं। इन सभी कार्यक्रमों को बिना किसी चर्चा के फंडिंग से वंचित कर दिया गया है।


संविधान की क्या कहता है?

कांग्रेस का अधिकार:
संविधान के अनुसार, अमेरिका में सरकारी खर्च को नियंत्रित करने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है। आमतौर पर राष्ट्रपति या व्हाइट हाउस को किसी भी बजट या फंडिंग में बदलाव करने से पहले कांग्रेस की मंजूरी लेनी होती है। लेकिन ट्रंप ने एक पुराने कानूनी प्रावधान "पॉकेट रीसिशन" का उपयोग किया है, जिससे वे सीधे कांग्रेस को बायपास कर सकते हैं।


राष्ट्रपति का फंड रोकने का अधिकार

45 दिनों तक का अधिकार:
व्हाइट हाउस के बजट निदेशक रसेल वॉट के अनुसार, राष्ट्रपति को किसी भी फंडिंग को अस्थायी रूप से 45 दिनों तक रोकने का अधिकार है। चूंकि अमेरिकी वित्तीय वर्ष 30 सितंबर को समाप्त होता है, यदि इस समय तक कांग्रेस कोई कार्रवाई नहीं करती, तो यह राशि बिना उपयोग के वापस चली जाएगी। यह प्रक्रिया 1977 के बाद पहली बार लागू की गई है।


संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र की चिंता:
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने इस निर्णय पर चिंता व्यक्त की है, यह कहते हुए कि अमेरिका के इस कदम से उनके बजट और नकदी प्रवाह पर असर पड़ेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वे अमेरिकी अधिकारियों से इस विषय पर और जानकारी प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं।


विपक्ष का विरोध

डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन का विरोध:
डेमोक्रेट्स का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन अब तक कुल 425 बिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग रोक चुका है। वहीं, कई रिपब्लिकन नेता जो आमतौर पर खर्च में कटौती के पक्ष में रहते हैं, वे भी इस बार ट्रंप के इस तरीके से असहमत हैं। सीनेटर सुसान कॉलिन्स, जो सीनेट की बजट समिति की अध्यक्ष हैं, ने इस कदम को कानून का उल्लंघन बताया है। उनका मानना है कि खर्च में कटौती एक द्विदलीय प्रक्रिया से होनी चाहिए, न कि राष्ट्रपति की मर्जी से।


राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच टकराव

संघर्ष की गंभीरता:
डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम दर्शाता है कि अमेरिका में राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच बजट को लेकर संघर्ष कितना गंभीर हो सकता है। ट्रंप के इस निर्णय ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राष्ट्रीय बजट पर किसका अधिकार होता है, राष्ट्रपति का या कांग्रेस का।