डोनाल्ड ट्रम्प का ग्रीनलैंड पर कब्जे का जोरदार समर्थन
अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की आवश्यकता
डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर दिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फिर से कहा है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कब्जा होना अनिवार्य है। उन्होंने बुधवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की आवश्यकता है। ट्रम्प ने नाटो से भी इस मामले में अमेरिका का समर्थन करने की अपील की।
रूस और चीन का बढ़ता प्रभाव
ट्रम्प ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं रखता है, तो रूस या चीन वहां अपनी उपस्थिति बढ़ा सकते हैं, जो स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका के पास होने से नाटो की ताकत और बढ़ जाएगी। ट्रम्प ने नाटो के भविष्य पर चिंता जताते हुए कहा कि अमेरिका की सैन्य शक्ति के बिना यह संगठन कमजोर हो जाएगा।
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री का बयान
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने कहा है कि यदि ग्रीनलैंड को अमेरिका और डेनमार्क में से किसी एक को चुनना पड़े, तो वह डेनमार्क को प्राथमिकता देंगे। यह बयान तब आया जब ट्रम्प ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी दे रहे थे। नीलसन ने यह बात 13 जनवरी को कोपेनहेगन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही।
ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट
ट्रम्प ने नीलसन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह उन्हें नहीं जानते और उनके विचारों से सहमत नहीं हैं। अमेरिकी संसद में 12 जनवरी को ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करना है। यदि यह बिल पास होता है, तो ग्रीनलैंड अमेरिका का 51वां राज्य बन सकता है।
नाटो की रक्षा जिम्मेदारी
नीलसन ने कहा कि ग्रीनलैंड नाटो का सदस्य है और उसकी रक्षा नाटो को करनी चाहिए। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने कहा कि अमेरिका से मिल रहे इस दबाव का सामना करना आसान नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ग्रीनलैंड पर हमला हुआ, तो इससे ट्रांस-अटलांटिक डिफेंस एग्रीमेंट का अंत हो सकता है।
ट्रम्प का ग्रीनलैंड के लोगों को अमेरिका में शामिल करने का प्रस्ताव
डोनाल्ड ट्रम्प ने 12 जनवरी को ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की आवश्यकता है और वे इस दिशा में कदम उठाने के लिए तैयार हैं, चाहे अन्य देशों को यह पसंद आए या नहीं। हालांकि, यह बिल अभी केवल प्रस्तावित है और इसे हाउस और सीनेट दोनों में पास होना है।