तमिलनाडु की अन्नाद्रमुक को बड़ा झटका, कई नेता हुए पार्टी छोड़कर टीवीके में शामिल
अन्नाद्रमुक में बगावत का नया अध्याय
नई दिल्ली: तमिलनाडु की प्रमुख विपक्षी पार्टी अन्नाद्रमुक को हाल ही में एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी के कई वरिष्ठ पूर्व मंत्रियों, विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों ने 'तमिलगा वेट्री कझगम' में शामिल होने का निर्णय लिया है।
नए नेताओं की लंबी सूची
सत्तारूढ़ दल में शामिल होने वाले नेताओं की संख्या काफी अधिक है। इसमें अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री वेल्लामंडी नटराजन, अन्ना ट्रेड यूनियन फेडरेशन के प्रदेश सचिव कमलाक्कन्नन, माइलापुर से पूर्व विधायक नटराज और पूर्व मंत्री आनंदन शामिल हैं। इसके अलावा, परमकुडी के पूर्व विधायक साधन प्रभाकर और तिरुपत्तूर के शहर सचिव डी.टी. कुमार ने भी अपने समर्थकों के साथ टीवीके का झंडा थाम लिया है।
जयललिता के अनुशासन की याद
अन्नाद्रमुक छोड़ने वाले प्रमुख चेहरों में से एक पूर्व मंत्री उडुमलाई राधाकृष्णन ने इस विभाजन के कारणों का खुलासा किया। उन्होंने त्रिची के एन.आर. शिवपति, कदंबुर राजू, एम.सी. संपत और पनीरसेल्वम जैसे नेताओं के पार्टी छोड़ने की पुष्टि की। राधाकृष्णन ने दिवंगत नेता जे. जयललिता के कार्यकाल के अनुशासन को याद करते हुए कहा कि 'अम्मा' के निधन के बाद पार्टी अपनी दिशा से भटक गई है।
मुख्यमंत्री जोसेफ विजय का नेतृत्व
राधाकृष्णन ने वर्तमान नेतृत्व पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में वे एक घुटन भरे माहौल में काम कर रहे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व में एमजीआर और जयललिता के जनकल्याणकारी आदर्शों की झलक देखी है। टीवीके में मिले सम्मान और नई पहचान के कारण वे इस नए आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित हुए हैं।
टीवीके की सफलता की कहानी
इस समारोह में राज्य के कैबिनेट मंत्री सेंगोट्टैयन ने पार्टी की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने गर्व से कहा कि भारतीय राजनीति में शायद ही कोई ऐसा दल होगा जिसने अपने गठन के मात्र दो वर्षों में इतनी अभूतपूर्व सफलता और लोकप्रियता हासिल की हो। सेंगोट्टैयन ने दावा किया कि तमिलनाडु की जनता ने मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व को स्वीकार कर लिया है, जिन्हें कोई भी गठबंधन कभी नहीं हरा पाएगा।