तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने मेकेदातु बांध परियोजना पर केंद्र से रोक लगाने की मांग की
मुख्यमंत्री विजय का पत्र
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजकर केंद्र सरकार से कर्नाटक की मेकेदातु बांध परियोजना पर तत्काल रोक लगाने की अपील की है। इस कदम ने कावेरी नदी के जल विवाद को फिर से चर्चा में ला दिया है, जो वर्षों से तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच चल रहा है।
मुख्यमंत्री का तर्क
अपने पत्र में, मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र से अनुरोध किया है कि कर्नाटक की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को अस्वीकार किया जाए। उनका कहना है कि यह प्रस्तावित बांध 2007 के कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के निर्णय और 2018 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन करता है। उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग की आलोचना करते हुए कहा कि तमिलनाडु के विरोध के बावजूद इस परियोजना पर विचार क्यों किया जा रहा है।
मेकेदातु परियोजना का विवरण
मेकेदातु परियोजना कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा पर कावेरी नदी पर प्रस्तावित एक बांध और जलाशय है। कर्नाटक सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था करना है, साथ ही बिजली उत्पादन की योजना भी है।
हालांकि, तमिलनाडु इस परियोजना का विरोध कर रहा है। राज्य सरकार को चिंता है कि यदि कर्नाटक ने नदी के ऊपरी हिस्से में अधिक पानी जमा किया, तो तमिलनाडु को आने वाले पानी की मात्रा में कमी आएगी, जिससे कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों की आजीविका प्रभावित होगी।
कानूनी पहलू
मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि कावेरी विवाद का समाधान दशकों की कानूनी लड़ाई के बाद हुआ था और वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेकेदातु परियोजना का नाम स्वीकृत परियोजनाओं की सूची में नहीं है और एक नया जलाशय बनाना अदालत के निर्णय का उल्लंघन होगा।
राजनीतिक तनाव
यह राजनीतिक तनाव तब बढ़ गया जब कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक जल्द ही केंद्र को संशोधित प्रोजेक्ट रिपोर्ट सौंपेगा। उनके इस बयान ने तमिलनाडु में राजनीतिक पार्टियों और किसान संगठनों में नाराजगी पैदा कर दी।
कावेरी विवाद का इतिहास
कावेरी नदी जल विवाद दक्षिण भारत के सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है, जिसमें तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी के बीच पानी के बंटवारे को लेकर मतभेद हैं। इस मुद्दे पर कई बार हिंसक प्रदर्शन और राजनीतिक टकराव हो चुके हैं।
तमिलनाडु के लिए किसानों के हितों की रक्षा करना प्राथमिकता है, जबकि कर्नाटक का तर्क है कि बेंगलुरु की बढ़ती जनसंख्या के लिए पानी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए यह परियोजना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री विजय की राजनीतिक चुनौती
यह मुद्दा मुख्यमंत्री विजय के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है। विपक्षी पार्टियों ने उन पर दबाव डालना शुरू कर दिया है कि वे कर्नाटक के खिलाफ सख्त कदम उठाएं। नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस बांध को नहीं रोका गया, तो तमिलनाडु को पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा।