तमिलनाडु में चक्रवाती तूफान के कारण मछुआरों की मौत, मुख्यमंत्री ने मुआवजे की घोषणा की
चक्रवात के दौरान मछुआरों की त्रासदी
तमिलनाडु के कासिमेदु बंदरगाह से 29 अक्टूबर को समुद्र में गए नौ मछुआरों में से पांच की जान चली गई है। चक्रवाती तूफान के कारण समुद्र में फंसने के बाद, 3 नवंबर से इन मछुआरों का संपर्क टूट गया था। मुख्यमंत्री विजय ने मृतकों के परिवारों को 7 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।
इन मछुआरों के शव आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में बहकर आए हैं। राज्य सरकार ने शवों की पहचान और उन्हें वापस लाने के लिए मत्स्य विभाग के अधिकारियों की एक टीम भेजी है।
कासिमेदु मत्स्य बंदरगाह से 29 अक्टूबर को नौ मछुआरे समुद्र में गए थे, जिनमें पक्किरीसामी उर्फ सूर्या (49), एम. कुप्पन (48), एस. मोहन (47), के. राजेश (52), ए. मुरुगन (48), एल. कुप्पुस्वामी (58), सी. विजयकांत (44), ए. अरविंद (40) और एम. नारायणन (57) शामिल थे।
चक्रवाती तूफान की तेज हवाओं के कारण उनका ट्रॉलर समुद्र में फंस गया था, लेकिन एक अन्य नाव की मदद से उन्हें निज़ामपट्टनम बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंचाया गया। हालांकि, 2 नवंबर की रात को उनकी नाव में तकनीकी खराबी आ गई और नाव पलट गई। इसके बाद से उनका अन्य नावों से संपर्क टूट गया, जिससे उनके परिवारों में चिंता बढ़ गई।
आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के कोथापट्टनम तट पर शवों के बहकर आने की सूचना मिलने पर मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मोहन, मुरुगन और विजयकांत के शवों की पहचान की। इसके बाद दो और शव मिले हैं, जिनकी पहचान की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने लापता मछुआरों की तलाश के लिए खोज अभियान को तेज करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री विजय ने मछुआरों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रत्येक मृतक के परिवार को 7 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है, जिसमें से 2 लाख रुपये की राशि तुरंत प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को शवों को तमिलनाडु लाने के निर्देश दिए हैं।