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तमिलनाडु में परिवारवाद की राजनीति: एमके स्टालिन का नया कदम

भारत में परिवारवाद की चर्चा अक्सर गांधी परिवार और अन्य प्रमुख राजनीतिक परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती है। लेकिन तमिलनाडु में यह स्थिति और भी गहरी है, जहां मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अपने दामाद सबरीसन वेदमूर्ति को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है। इस कदम से राज्य की राजनीति में परिवारवाद की और भी स्पष्टता सामने आएगी। जानें इस परिवार के राजनीतिक इतिहास और वर्तमान स्थिति के बारे में।
 

परिवारवाद का प्रभाव

भारत में जब परिवारवाद या वंशवाद की चर्चा होती है, तो अक्सर कांग्रेस के गांधी परिवार, लालू यादव का परिवार और मुलायम सिंह यादव के परिवार का नाम लिया जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि हर राज्य में परिवारवाद की गहरी जड़ें हैं, जिन पर राजनीतिक दल और मीडिया ध्यान नहीं देते। तमिलनाडु में तो लगभग पूरी राजनीति परिवारों या फिल्म उद्योग से जुड़े व्यक्तियों के हाथ में है, हालांकि कुछ अपवाद हो सकते हैं। इस बीच, राज्य में सत्तारूढ़ परिवार का एक और सदस्य राजनीति में कदम रखने की तैयारी कर रहा है।


एमके स्टालिन का निर्णय

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अपने दामाद सबरीसन वेदमूर्ति को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है। सबरीसन की शादी स्टालिन की बेटी सेंथामराई से हुई है। वह डीएमके की राजनीति में पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और अब उन्हें सार्वजनिक रूप से लाने की योजना बनाई जा रही है। उल्लेखनीय है कि स्टालिन ने अपने बेटे उदयनिधि को राज्य का उप मुख्यमंत्री बनाया है, जबकि उनकी बहन कनिमोझी लोकसभा में पार्टी की नेता हैं। मारन परिवार उनके मामा का परिवार है, और भाई अलागिरी भी राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते थे, लेकिन पारिवारिक विवाद के कारण वे किनारे हो गए।