तमिलनाडु में सी. जोसेफ विजय की पीएम पद की दावेदारी से राजनीतिक हलचल
सी. जोसेफ विजय का राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश
चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, जो पहली बार चुनावी मैदान में उतरे थे, अब राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गए हैं। उनकी पार्टी, तमिलागा वेत्री कझगम (TVK), के नेताओं ने उन्हें देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में पेश किया है, जिससे राज्य और दिल्ली में राजनीतिक हलचल मच गई है। इस पर टीवीके की सहयोगी कांग्रेस और अन्य दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इस विवाद के बीच, टीवीके ने 9 सितंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसमें गठबंधन के नाम पर मुहर लगने के साथ-साथ पीएम चेहरे के विवाद पर भी चर्चा होने की संभावना है।
टीवीके मंत्रियों का विजय को पीएम बताना
टीवीके के नेताओं और मंत्रियों के बयानों ने इस विवाद को जन्म दिया है। राज्य सरकार में मंत्री एम. शरतकुमार ने स्पष्ट रूप से कहा कि विजय दिन-रात काम करते हैं और वे ही देश के अगले प्रधानमंत्री हैं। वहीं, दुग्ध एवं डेयरी विकास मंत्री सी. विजयलक्ष्मी ने यह भी कहा कि उत्तर भारत के लोग भी विजय जैसे मुख्यमंत्री की चाह रखते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि युवाओं में विजय के प्रति बढ़ती लोकप्रियता ने कई पुराने नेताओं को राजनीति से संन्यास लेने पर मजबूर कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री के. जी. अरुणराज ने कहा कि 9 सितंबर की बैठक में गठबंधन को एक औपचारिक पहचान दी जाएगी।
गठबंधन सहयोगियों की प्रतिक्रिया
टीवीके नेताओं के दावों ने गठबंधन के सहयोगियों, खासकर कांग्रेस को असहज कर दिया है। कांग्रेस विधायक और पर्यटन मंत्री एस. राजेश कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि टीवीके ने 2029 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के बजाय विजय को पीएम चेहरे के रूप में पेश करने की कोशिश की, तो कांग्रेस के दोनों मंत्री तुरंत कैबिनेट से इस्तीफा दे देंगे। सीपीएम महासचिव एम. ए. बेबी ने भी स्पष्ट किया कि चुनाव के बाद ही चेहरे पर चर्चा होगी और राहुल गांधी का दावा सबसे मजबूत है।
सरकार की स्थिरता पर खतरा
पीएम पद की दावेदारी का असर तमिलनाडु सरकार की स्थिरता पर पड़ सकता है। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 विधायकों की आवश्यकता होती है, जबकि विजय की पार्टी TVK के पास 107 सीटें हैं। सरकार को कांग्रेस के 5 विधायकों और अन्य दलों के समर्थन की आवश्यकता है। यदि पीएम पद के विवाद पर कोई सहयोगी दल समर्थन वापस लेता है, तो विजय सरकार संकट में पड़ सकती है। मुख्य विपक्षी दल डीएमके ने भी इस मुद्दे पर टीवीके के दावों को वास्तविकता से दूर बताया है।