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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: विजय की रैलियों में रद्दीकरण से बढ़ी राजनीतिक हलचल

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही विजय की रैलियों के रद्द होने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उनकी पार्टी, तमिलगा वेत्री कझगम (TVK), द्वारा कार्यक्रमों को रद्द करने से विपक्ष ने उन पर हमले तेज कर दिए हैं। इस स्थिति में विजय की चुनावी रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। क्या वह अंतिम समय में अपनी रणनीति में बदलाव करेंगे? जानें इस राजनीतिक विवाद के बारे में और अधिक जानकारी।
 

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की तैयारी

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: चुनावी माहौल अब पूरी तरह से गर्म हो चुका है। 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले प्रचार अपने चरम पर है, लेकिन इस बीच एक प्रमुख राजनीतिक चेहरा—विजय—अपनी रद्द की गई रैलियों के कारण चर्चा में हैं। उनकी पार्टी, तमिलगा वेत्री कझगम (TVK), द्वारा लगातार कार्यक्रमों को रद्द करने से विपक्ष को हमले का मौका मिल गया है। चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद सभी पार्टियां आक्रामक प्रचार में जुटी हैं, जबकि विजय के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम अचानक रद्द हो गए हैं। यह बात हैरान करने वाली है कि इन कार्यक्रमों के लिए चुनाव आयोग से अनुमति भी मिल चुकी थी, फिर भी इन्हें टाल दिया गया। पार्टी की ओर से इन फैसलों के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं.


विजय का चुनावी अभियान

इस चुनाव में विजय दो सीटों से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 30 मार्च को नामांकन दाखिल करने के बाद उन्होंने पेरम्बूर और कोलाथुर में प्रचार किया। इसके बाद तिरुचिरापल्ली पूर्व में भी रोड शो किया, लेकिन कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम रद्द होते चले गए, जिससे उनके चुनावी अभियान की गति प्रभावित होती दिख रही है। TVK ने कुछ कार्यक्रमों के रद्द होने का कारण सुरक्षा चिंताओं और समय की कमी बताया है। विल्लीवाक्कम, टी नगर, कुड्डालोर और तिरुवल्लूर जैसे क्षेत्रों में प्रस्तावित रैलियां और रोड शो रद्द कर दिए गए हैं। हालांकि, लगातार रद्दीकरण ने पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं.


विपक्ष का तीखा हमला

सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने इस मुद्दे पर तीखा हमला किया है। पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया है कि विजय “घर बैठे प्रचार” कर रहे हैं। राज्य के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने तंज करते हुए कहा कि असली नेता वही है जो जनता के बीच जाकर दिन-रात मेहनत करता है, न कि रुक-रुक कर प्रचार करने वाला। जहां एक ओर एम. के. स्टालिन, एडप्पादी के. पलानीस्वामी और सीमान जैसे नेता पूरे राज्य में जोरदार रैलियां कर रहे हैं, वहीं विजय की सीमित उपस्थिति TVK के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। प्रचार खत्म होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन विजय को अभी भी कई जिलों का दौरा करना है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वह अंतिम समय में अपनी रणनीति में बदलाव करेंगे या यह रफ्तार चुनावी परिणामों पर असर डालेगी.