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तमिलनाडु सरकार ने किसानों और शिक्षकों के खिलाफ केस वापस लेने का किया ऐलान

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय सी जोसेफ ने किसानों और शिक्षकों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेने का ऐलान किया है। यह निर्णय मानवीय आधार पर लिया गया है, जिसमें सरकार का उद्देश्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है। जानें इस फैसले के पीछे की वजह और सरकार की योजनाएं।
 

मुख्यमंत्री का महत्वपूर्ण निर्णय

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय सी जोसेफ ने घोषणा की है कि 2021 से अप्रैल 2026 तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले किसानों और शिक्षकों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी आजीविका के लिए और अधिकारियों के समक्ष अपनी मांगें शांतिपूर्ण तरीके से रख रहे थे, उनके खिलाफ दर्ज मामलों को समाप्त करने की आवश्यकता है.


सरकार का मानवीय दृष्टिकोण

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय मानवीय आधार पर लिया गया है। सरकार किसानों और शिक्षकों के साथ खड़ी है, उनके साथ संवाद स्थापित किया जाएगा और उनकी मांगों को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। सरकार ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.


प्रदर्शन का संदर्भ

तिरुवन्नामलाई जिले में स्टेट इंडस्ट्रीज प्रमोशन कॉर्पोरेशन ऑफ तमिलनाडु (SIPCOT) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों पर गुंडा एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए थे। पारंदुर में किसानों ने नए एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के खिलाफ भी प्रदर्शन किया था, जिसके चलते उनके खिलाफ भी मामले दर्ज हुए थे। किसानों का आरोप है कि उनकी भूमि छीनी जा रही है और पानी के तालाबों को नष्ट किया जा रहा है, जिससे उनकी आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.


केस वापस लेने का आधार

तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि पूर्व सरकार ने इन विद्रोहों को अमानवीय तरीके से दबाने का प्रयास किया था। वर्तमान में ये मामले लंबित हैं और इन्हें समाप्त किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को मजबूती मिलेगी और आम लोगों का सरकार में विश्वास बढ़ेगा.