तिरुपति मंदिर में दान का नया रिकॉर्ड: नई नीति का प्रभाव
तिरुपति मंदिर में दान की बाढ़
नई दिल्ली: तिरुमला के श्री वेंकटेश्वर मंदिर में एक दिन में दान की रिकॉर्ड राशि ने सबका ध्यान आकर्षित किया है। प्रारंभ में इसे धार्मिक आस्था का परिणाम माना गया, लेकिन बाद में इसका असली कारण सामने आया। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम द्वारा लागू की गई नई दान नीति से पहले, श्रद्धालुओं ने पुराने नियमों के तहत मिलने वाली आजीवन सुविधाओं को सुरक्षित रखने के लिए दान दिया। इस कारण मंदिर की आय ने नया रिकॉर्ड स्थापित किया।
दानदाताओं की संख्या में वृद्धि
मंगलवार को मंदिर में 2,460 श्रद्धालुओं ने दान दिया, जिससे कुल राशि 96.98 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इनमें से कई दानदाताओं ने एक लाख से 25 लाख रुपये तक का योगदान किया, जबकि दो श्रद्धालुओं ने एक-एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि अर्पित की। एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में दान मिलने से मंदिर प्रशासन ने रिकॉर्ड संग्रह दर्ज किया।
नई डोनर नीति में बदलाव
15 जुलाई की आधी रात से लागू नई नीति के अनुसार, दानदाताओं को मिलने वाली आजीवन सुविधाएं समाप्त कर दी गई हैं। अब व्यक्तिगत दानदाताओं को विशेष लाभ केवल 20 वर्षों तक और संस्थाओं को 15 वर्षों तक मिलेंगे। इसके साथ ही पुरानी स्लैब व्यवस्था को समाप्त कर नई श्रेणियां लागू की गई हैं, जिनके आधार पर सुविधाएं निर्धारित की जाएंगी।
डिजिटल दर्शन व्यवस्था
नई नीति के तहत विशेष दर्शन, सेवाओं और अन्य सुविधाओं का आवंटन अब ऑनलाइन डोनर मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से किया जाएगा। पहले कई मामलों में मैन्युअल प्रक्रिया अपनाई जाती थी। इसके अलावा, 50 लाख रुपये या उससे अधिक दान देने वालों को मिलने वाली सुप्रभात सेवा की वार्षिक संख्या भी घटाकर एक कर दी गई है।
स्मृति चिह्नों में बदलाव
दानदाताओं को दिए जाने वाले स्वर्ण और रजत स्मृति चिह्नों में भी बदलाव किया गया है। अब पहले की तुलना में कम वजन के स्वर्ण और चांदी के सिक्के दिए जाएंगे। मंदिर प्रशासन का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और सभी श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था को अधिक संतुलित बनाना है।
पुराने दानदाताओं के लिए विशेष लाभ
नई नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह पुराने दानदाताओं पर लागू नहीं होगी। 15 जुलाई से पहले दान देने वाले श्रद्धालुओं को पहले की तरह आजीवन सुविधाएं मिलती रहेंगी। यही कारण रहा कि नई व्यवस्था लागू होने से पहले हजारों लोगों ने जल्दी-जल्दी दान देकर पुराने नियमों के तहत मिलने वाले विशेषाधिकार सुरक्षित कर लिए।