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तिरुवल्लुर में अमोनिया गैस लीक से 7 की मौत, राहत कार्य जारी

तिरुवल्लुर जिले में एक समुद्री खाद्य प्रसंस्करण इकाई में अमोनिया गैस लीक होने से 7 महिलाओं की मौत हो गई। घटना के बाद प्रशासन ने NDRF को सक्रिय किया और राहत कार्य जारी है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस घटना ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
 

अमोनिया गैस लीक की घटना


तिरुवल्लुर जिले के पेरियापालयम के निकट कनिगईपैर में स्थित 'सेंट पीटर्स पॉल सीफूड्स एक्सपोर्ट्स' प्लांट में रविवार को अमोनिया गैस के रिसाव से सात लोगों की जान चली गई। इस घटना में सात महिलाओं की मौत की पुष्टि हुई है। गैस लीक के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया और कई प्रभावित व्यक्तियों को तुरंत अस्पताल भेजा गया। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) को सक्रिय किया है। राहत और बचाव कार्य लगातार चल रहे हैं और पूरे मामले की निगरानी की जा रही है।


हादसे के बाद का माहौल

रविवार की सुबह सेंट पीटर्स पॉल सीफूड्स एक्सपोर्ट्स में गैस लीक की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी फैल गई। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, गैस के संपर्क में आने से कई कर्मचारी प्रभावित हुए। सात महिलाओं की मौत हो गई, जबकि अन्य को सांस लेने में कठिनाई और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थानीय निवासियों ने बताया कि घटना के बाद फैक्ट्री और आसपास के क्षेत्र में भय का माहौल बन गया। प्रशासन ने तुरंत सुरक्षा उपाय लागू करते हुए लोगों को प्रभावित क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी।


प्रशासन की कार्रवाई

घटना की जानकारी मिलते ही तिरुवल्लुर जिला कलेक्टर कार्यालय ने आपात स्थिति घोषित की और एनडीआरएफ की चौथी बटालियन को अलर्ट किया। अरक्कोनम स्थित मुख्यालय से समन्वय स्थापित कर चेन्नई से 30 सदस्यीय विशेष बचाव दल को घटनास्थल पर भेजा गया। यह टीम आधुनिक सुरक्षा उपकरणों और तकनीकी संसाधनों के साथ मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिक उद्देश्य प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और किसी भी संभावित खतरे को नियंत्रित करना था।


बचाव अभियान की शुरुआत

बचाव दल ने व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई), गैस पहचानने वाले यंत्र और रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल तथा परमाणु खतरों से निपटने वाले विशेष सीबीआरएन उपकरण लेकर पहुंचा। टीम ने प्रभावित क्षेत्र को घेरकर वहां प्रवेश को नियंत्रित किया और गैस के प्रभाव का अध्ययन शुरू किया। विशेषज्ञों ने फैक्ट्री परिसर में सुरक्षा जांच भी की ताकि रिसाव के स्रोत और उसके प्रभाव का सही आकलन किया जा सके। राहतकर्मी अस्पतालों और स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं ताकि प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता मिल सके।


जांच और राहत प्रयास

अधिकारियों के अनुसार, बचाव और जोखिम कम करने की कार्रवाई अभी भी जारी है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और गैस रिसाव के कारणों का पता लगाया जा रहा है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक किया गया था। प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय प्रशासन सक्रिय है। यह घटना औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।