तेल की कीमतों में ऐतिहासिक वृद्धि: 124 डॉलर प्रति बैरल के पार, ईरान ने 140 डॉलर की चेतावनी दी
तेल की कीमतों में ऐतिहासिक वृद्धि
तेल की कीमतों में ऐतिहासिक वृद्धि: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण, वैश्विक तेल की कीमतें चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत $123.81 प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो कि $124 के करीब है। यह मार्च 2022 के बाद से सबसे ऊंचा स्तर है।
इस वृद्धि का कारण
रिपोर्टों के अनुसार, इस कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण भू-राजनीतिक तनाव है। यह तनाव तब बढ़ा जब डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर अपनी सैन्य नाकेबंदी तब तक जारी रखेगा जब तक तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम से संबंधित शर्तों को मानने के लिए सहमत नहीं होता।
इस स्थिति ने 'होरमुज़ जलडमरूमध्य' के आसपास दबाव बढ़ा दिया है, जो कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। यहां तनाव बढ़ने से तेल आपूर्ति में बाधा आने की आशंका बढ़ गई है।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़ ने इस कीमतों में वृद्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तेल की कीमतें जल्द ही $140 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व को 'गलत सलाह' मिलने का आरोप लगाया और कहा कि अमेरिकी नीतियां वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता को बढ़ावा दे रही हैं।
अमेरिका का युद्ध पर खर्च
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष पर केवल दो महीनों में $25 बिलियन खर्च किए हैं। पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस खर्च का अधिकांश हिस्सा हथियारों और सैन्य साजो-सामान पर खर्च किया गया है।
ट्रम्प ने अपनी एक तस्वीर साझा की जिसमें उन्होंने राइफल पकड़ी हुई है, और लिखा है, 'अब और 'मिस्टर नाइस गाय' नहीं'। यह ईरान के प्रति उनके सख्त रुख का संकेत है।
ईरान की संयुक्त राष्ट्र में शिकायत
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में एक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उसने अमेरिका पर उसके जहाजों और 3.8 मिलियन बैरल तेल को जब्त करने का आरोप लगाया है।
लेबनान में खाद्य संकट का खतरा
संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी रिपोर्टों में चेतावनी दी गई है कि युद्ध और आर्थिक संकट के कारण लेबनान में 1.2 मिलियन से अधिक लोगों को गंभीर खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है।
भारत-ईरान कूटनीतिक वार्ता में, एस. जयशंकर और अब्बास अराघची ने संघर्ष-विराम के प्रयासों और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की।
निष्कर्ष
तेल की कीमतों में आई यह भारी वृद्धि यह दर्शाती है कि भू-राजनीतिक संघर्षों का वैश्विक बाजारों पर कितना प्रभाव पड़ सकता है। तनाव अभी भी बढ़ रहा है, जिससे तेल की कीमत $140 प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना अब कोई दूर की बात नहीं रह गई है।