तेल की कीमतों में वृद्धि से विमानन उद्योग पर संकट
विमानन उद्योग पर तेल बाजार की उथल-पुथल का प्रभाव
नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद तेल बाजार में आई उथल-पुथल का असर अब विमानन क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। जर्मनी की प्रमुख एयरलाइन लुफ्थांसा ने 20,000 उड़ानें रद्द करने का निर्णय लिया है, जबकि भारत की विमानन कंपनियों ने भी अपनी सेवाएं जारी रखना कठिन बताया है। कंपनियों का कहना है कि तेल की बढ़ती कीमतों के कारण उनके परिचालन खर्च में वृद्धि हो रही है। पिछले साल इंडिगो के संकट के दौरान किराए पर लागू सीमा हटने के बाद से कंपनियां मनमाने किराए वसूल रही हैं।
विमानन कंपनियों की चिंताएं
इंडिगो, एयर इंडिया, और स्पाइसजेट सहित भारत की सभी विमानन कंपनियों के संगठन, फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने नागरिक विमानन मंत्रालय को एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की बढ़ती कीमतों के कारण उनका परिचालन खर्च 20 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इस स्थिति में कंपनियों के लिए कामकाज जारी रखना मुश्किल हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो उन्हें विमानों का परिचालन रोकने या विमानों को खड़ा करने की नौबत आ सकती है।
सरकार से राहत की मांग
फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने सरकार से उत्पाद शुल्क और वैट में कमी की मांग की है, ताकि विमानन क्षेत्र घाटे की भरपाई कर सके। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें 28 फरवरी से अब तक 45 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी हैं। हालांकि, सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमतों में बढ़ोतरी की सीमा 25 प्रतिशत तय की थी। इसके चलते अप्रैल में पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों ने घरेलू एटीएफ की कीमतों में बहुत कम वृद्धि की।
विमानन कंपनियों की वित्तीय स्थिति
विमानन कंपनियों के संगठन ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में तेल की कीमतों के बीच भारी अंतर ने उनके नेटवर्क को वित्तीय रूप से अस्थिर कर दिया है। पहले, कंपनियों के कुल परिचालन खर्च में तेल का हिस्सा 40 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुंच गया है। फेडरेशन ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं: एटीएफ पर लागू 11 प्रतिशत उत्पाद शुल्क को रोकना, प्रमुख राज्यों में एटीएफ पर वैट को कम करना, और कोविड के बाद 2022 में शुरू किए गए 'क्रूड ब्रेंट प्राइसिंग मैकेनिज्म' को फिर से लागू करना।
भविष्य की चुनौतियाँ
फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो विमानन कंपनियों को अपनी क्षमता में कमी लानी पड़ेगी और उड़ानों की संख्या घटानी होगी, जिससे यात्रियों और कनेक्टिविटी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस स्थिति को देखते हुए, नागरिक विमानन मंत्रालय ने अप्रैल 2026 से तीन महीने के लिए घरेलू कंपनियों के लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में 25 प्रतिशत की कटौती की है। इसके अलावा, केंद्र सरकार विमानन क्षेत्र के लिए 5,000 करोड़ रुपये की 'इमरजेंसी एयरलाइन क्रेडिट स्कीम' लाने पर भी विचार कर रही है।