तेलंगाना में श्री राम नवमी पर अनोखी परंपरा: एक प्रेम कहानी का जश्न
तेलंगाना में प्रेम की अनोखी परंपरा
हर वर्ष श्री राम नवमी के अवसर पर तेलंगाना के महबूबाबाद जिले में एक विशेष दृश्य देखने को मिलता है। इस दिन, एक दंपति अपने दिवंगत बेटे और उसकी प्रेमिका के प्यार को पूरा करने के लिए रस्में निभाते हैं, जिसमें पूरे गांव के लोग शामिल होते हैं। यह परंपरा पिछले 22 वर्षों से निरंतर चल रही है।
दुखद प्रेम कहानी
लालू और सुक्कम्मा के इकलौते बेटे राम कोटी की शादी 2003 में तय हुई थी। लेकिन लड़की के परिवार ने इस रिश्ते का विरोध किया, जिससे राम कोटी ने आत्महत्या कर ली। उसकी प्रेमिका ने भी 20 दिन बाद आत्महत्या कर ली, जिससे परिवार में भारी दुख छा गया।
परंपरा की शुरुआत
बेटे की मृत्यु के बाद परिवार में शोक का माहौल था। सुक्कम्मा बताती हैं कि एक रात उनके बेटे ने सपने में आकर कहा कि वे एक मंदिर बनाएं और उनकी शादी कराएं। इसके बाद दंपति ने घर में एक छोटा मंदिर बनवाया और राम कोटी और उसकी प्रेमिका की मूर्तियां स्थापित कीं। तब से हर साल राम नवमी पर इन मूर्तियों का विवाह समारोह आयोजित किया जाता है।
गांव का सहयोग
यह रस्म केवल पूजा नहीं है, बल्कि यह उनके बेटे के अधूरे सपने को पूरा करने का एक तरीका है। सुक्कम्मा कहती हैं कि उनके बेटे की शादी इस दुनिया में नहीं हो सकी, लेकिन वे हर साल उसे खुश रखने का प्रयास करते हैं। गांव वाले भी इस परंपरा का सम्मान करते हैं। 22 वर्षों से चल रही यह परंपरा अब महबूबाबाद की पहचान बन चुकी है, और हर राम नवमी पर गांव में खुशी और श्रद्धा का माहौल होता है।