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तेहरान में अमेरिका की बड़ी कार्रवाई, ट्रंप का दावा - कई ईरानी नेता समाप्त

मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़े हमले का दावा किया है जिसमें कई ईरानी सैन्य नेताओं को समाप्त किया गया है। इस हमले के बाद ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिससे क्षेत्र में स्थिति और भी गंभीर हो गई है। जानें इस संघर्ष के पीछे की कहानी और इसके संभावित परिणाम।
 

ईरान-अमेरिका संघर्ष में नई उथल-पुथल

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा संघर्ष अब और भी गंभीर हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि तेहरान में एक बड़े हमले में कई ईरानी सैन्य नेताओं को समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने इस हमले से संबंधित वीडियो फुटेज भी साझा किया, लेकिन हमले के स्थान और अन्य विवरणों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।


ट्रंप ने पहले चेतावनी दी थी कि यदि ईरान किसी समझौते पर नहीं पहुंचता, तो उस पर गंभीर परिणाम होंगे। इस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया कि अगर अमेरिका और इजराइल ने तनाव बढ़ाया, तो पूरा क्षेत्र 'जहन्नुम' बन जाएगा। शनिवार को ईरान ने खाड़ी देशों, इराक और इजराइल की ओर मिसाइल हमलों का एक नया दौर शुरू किया। कई मिसाइलों को रोक दिया गया, लेकिन मलबे से नुकसान की खबरें आई हैं।




इस बीच, दक्षिणी ईरान में एक अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान को गिराने की खबर है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, एक पायलट को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि एक अन्य क्रू सदस्य अब भी लापता है, जिसकी खोज जारी है। ईरानी अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे लापता अमेरिकी सैनिक को 'जिंदा' पकड़वाएं, जिसके लिए इनाम की घोषणा की गई है। वहीं, खोज और बचाव अभियान में शामिल एक अमेरिकी A-10 वॉर्थॉग विमान पर भी हमला हुआ, लेकिन उसके पायलट को सुरक्षित बताया गया है।


यह ध्यान देने योग्य है कि पिछले सप्ताह ट्रंप ने ईरान को समझौते का एक और मौका देने के लिए ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को 10 दिनों के लिए रोकने की घोषणा की थी। इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों से हुई थी। अब तक इस युद्ध में हजारों लोगों की जानें जा चुकी हैं। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में भारी वृद्धि देखी जा रही है, महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित हुए हैं और ईंधन महंगा हो गया है। दोनों पक्षों द्वारा नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने की धमकियों और हमलों के कारण संभावित युद्ध अपराधों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।