त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ का निधन: एक जांच अधिकारी की कहानी
अनुराग धनखड़ का शव पुलिस मुख्यालय में मिला
त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक अनुराग धनखड़ का शव सोमवार सुबह पुलिस मुख्यालय में अचेत अवस्था में पाया गया। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह आत्महत्या का मामला प्रतीत होता है।
उनका शव वर्तमान में अगरतला के गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल में रखा गया है, और पुलिस तथा फॉरेंसिक टीम घटना स्थल की जांच कर रही है। अनुराग धनखड़ 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी थे और बागपत के निवासी थे। उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच की थी।
अनुराग धनखड़ का पुलिस करियर
अनुराग धनखड़, जो 1994 बैच के त्रिपुरा कैडर के आईपीएस अधिकारी थे, बागपत के बिहारीपुर गांव के निवासी थे। उन्होंने अपने पुलिस करियर का अधिकांश समय त्रिपुरा में बिताया और राज्य में लगभग 16 वर्षों तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
हाल ही में उन्हें त्रिपुरा का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया था, इससे पहले वे डीजीपी (इंटेलिजेंस) के पद पर कार्यरत थे।
1984 सिख विरोधी दंगों की विशेष जांच टीम के अध्यक्ष
अनुराग धनखड़ ने 2005 से 2013 और 2016 से 2023 तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहते हुए कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वे गृह मंत्रालय के अधीन गठित 1984 के सिख विरोधी दंगों की विशेष जांच टीम के अध्यक्ष भी रहे। इस दौरान उन्होंने कई पुराने मामलों की पुनः जांच की और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नीरव मोदी केस में प्रमुख भूमिका
अनुराग धनखड़ को सबसे अधिक पहचान तब मिली जब उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो में रहते हुए भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी से जुड़े पंजाब नेशनल बैंक घोटाले की जांच का नेतृत्व किया। यह देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक था, जिसमें लगभग 13,000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था।
सीबीआई में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य
सीबीआई में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान, अनुराग धनखड़ ने पुलिस अधीक्षक, उप महानिरीक्षक, संयुक्त निदेशक और अतिरिक्त निदेशक जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उन्हें एक कुशल और निष्पक्ष जांच अधिकारी के रूप में जाना जाता था।