दक्षिणी अटलांटिक में हंटावायरस संक्रमण से बढ़ी चिंता
लक्जरी क्रूज जहाज पर हंटावायरस का प्रकोप
दक्षिणी अटलांटिक में चल रहे लक्जरी क्रूज जहाज एमवी होंडियस पर फैले हंटावायरस संक्रमण ने वैश्विक चिंता को जन्म दिया है। जांच एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या यह प्रकोप अर्जेंटीना से शुरू हुआ, जहां से यह अंटार्कटिका की यात्रा प्रारंभ हुई थी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अर्जेंटीना को लैटिन अमेरिका में हंटावायरस संक्रमण के सबसे अधिक मामलों वाले देशों में से एक माना है। अर्जेंटीना के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, जून 2025 से अब तक देश में 101 संक्रमण की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले “एंडीज वायरस” से “हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम” नामक गंभीर फेफड़ों की बीमारी होती है, जो कई मामलों में जानलेवा साबित हो सकती है। अर्जेंटीना के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि पिछले एक वर्ष में संक्रमित मरीजों में से लगभग एक-तिहाई की मृत्यु हो गई।
अधिकारियों ने पुष्टि की है कि क्रूज जहाज पर कई यात्रियों में एंडीज वायरस पाया गया है। अब तक तीन यात्रियों की मौत हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति दक्षिण अफ्रीका के अस्पताल में गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती है। तीन अन्य यात्रियों को इलाज के लिए जहाज से निकाला गया है। यात्रा के दौरान पहले जहाज छोड़ चुके एक यात्री के संक्रमण की पुष्टि स्विजरलैंड में हुई है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अर्जेंटीना ने स्पेन, सेनेगल, दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड और यूना को वायरस की आनुवंशिक सामग्री और जांच उपकरण भेजने का निर्णय लिया है, ताकि संभावित संक्रमित यात्रियों की पहचान की जा सके।
हंटावायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों के मूत्र, लार या मल के संपर्क से फैलता है। आमतौर पर यह इंसानों के बीच नहीं फैलता, लेकिन एंडीज वायरस के कुछ पुराने प्रकोपों में सीमित मानव-से-मानव संक्रमण देखा गया है।
संक्रमण के प्रारंभिक लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं—बुखार, बदन दर्द, सिरदर्द और थकान। इसके बाद यह तेजी से फेफड़ों को प्रभावित कर सांस लेने में गंभीर दिक्कत पैदा कर सकता है।
इस बीच, चिंता उन 23 यात्रियों को लेकर भी बढ़ गई है जो 23 अप्रैल को सेंट हेलेना द्वीप पर जहाज से उतरे थे। स्पेनिश अखबार एह्ल पाइस के अनुसार, कई दिनों तक उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका और बढ़ गई है।
खबर है कि ये लोग अमेरिका समेत अपने-अपने देशों में लौट गए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि जॉर्जिया, कैलिफोर्निया और एरिजोना में अमेरिकी यात्रियों पर नजर रखी जा रही थी, हालांकि उनमें से किसी में भी बीमारी के लक्षण नहीं दिखे थे।
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि क्रूज शिप पर पहली मौत 11 अप्रैल को 70 साल के एक डच व्यक्ति की हुई थी। लगभग दो हफ्ते बाद, सेंट हेलेना में उनकी बॉडी को जहाज से उतारा गया। उनकी 69 साल की पत्नी सेंट हेलेना से साउथ अफ्रीका के लिए प्लेन से यात्रा कर रही थीं; वह जोहान्सबर्ग एयरपोर्ट पर गिर गईं और 26 अप्रैल को एक अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। तीसरी यात्री एक जर्मन महिला थीं जिनकी मृत्यु 2 मई को हुई।