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दक्षिणी प्रशांत महासागर में 6.1 तीव्रता का भूकंप

दक्षिणी प्रशांत महासागर में रविवार रात को 6.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई पर था। इस घटना के कारण सतही भूकंप के खतरों के बारे में जानकारी दी गई है। जानें कि कैसे टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल से भूकंप आते हैं और इसके संभावित प्रभाव क्या हो सकते हैं।
 

दक्षिणी प्रशांत महासागर में भूकंप का अनुभव


रविवार की रात, दक्षिणी प्रशांत महासागर में एक शक्तिशाली भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया कि इस भूकंप की तीव्रता 6.1 मापी गई। यह घटना रात 8:57:59 बजे हुई।


भूकंप का केंद्र अक्षांश 15.353 दक्षिण और देशांतर 172.824 पश्चिम पर स्थित था, और इसकी गहराई केवल 10 किलोमीटर थी। इस कम गहराई के कारण झटके अधिक तीव्रता से महसूस किए गए। एनसीएस ने इस जानकारी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया।


सतही भूकंप के प्रभाव

सतही भूकंप गहरे भूकंपों की तुलना में अधिक खतरनाक होते हैं, क्योंकि भूकंपीय लहरें सीधे जमीन की सतह तक पहुंचती हैं। इससे इमारतों को हिलने और नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। इस बार भी गहराई कम होने के कारण आफ्टरशॉक की संभावना बनी हुई है। हालांकि, समुद्र में होने के कारण बड़े नुकसान की कोई सूचना नहीं आई है। यह क्षेत्र पृथ्वी के सबसे सक्रिय भूकंपीय जोन 'रिंग ऑफ फायर' का हिस्सा है, जहां दुनिया के 81 प्रतिशत बड़े भूकंप आते हैं।


टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल और एक प्लेट के नीचे दूसरी के डूबने (सबडक्शन) से ऐसे भूकंप उत्पन्न होते हैं। इतिहास में यहां 1960 का चिली भूकंप (9.5) और 1964 का अलास्का भूकंप (9.2) जैसे विनाशकारी हादसे हो चुके हैं।


टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधि

पृथ्वी का सतह सात बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों पर निर्भर करता है, जो हमेशा गतिशील रहती हैं। जहां ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, वहां फॉल्ट लाइन बनती है। लगातार दबाव के कारण प्लेटों के किनारे मुड़ जाते हैं। जब दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है, तो प्लेटें टूट जाती हैं, जिससे अंदर की ऊर्जा बाहर निकलती है और भूकंप आता है।


जहां प्लेटों में हलचल से ऊर्जा निकलती है, उसे हाइपोसेंटर कहा जाता है। ठीक ऊपर की सतह पर एपिसेंटर होता है, जहां कंपन सबसे तेज होता है। जैसे-जैसे दूरी बढ़ती है, प्रभाव कम होता जाता है। रिक्टर स्केल पर 7 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप 40 किमी के दायरे में बहुत तेज झटके देते हैं। भूकंप की ताकत रिक्टर स्केल से मापी जाती है, जो 1 से 9 तक होती है और भूकंप से निकलने वाली ऊर्जा को मापती है।