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दिनेश त्रिवेदी बने बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त, चीन से बढ़ी चुनौती

पूर्व सांसद दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है, साथ ही उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया है। इस नियुक्ति के साथ ही बांग्लादेश ने चीन के साथ मंगला बंदरगाह को लेकर नए समझौते किए हैं, जो भारत के लिए रणनीतिक रूप से चिंता का विषय बन गए हैं। जानें इस नई स्थिति के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

दिनेश त्रिवेदी की नई नियुक्ति


भारत सरकार ने पूर्व सांसद और केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किया है। उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया है, हालांकि यह दर्जा व्यक्तिगत रूप से दिया गया है और इसके लिए टेबल ऑफ प्रिसिडेंस में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे पहले, आईके गुजराल और त्रिलोकी कौल को सोवियत संघ का राजदूत बनाए जाने पर और कर्ण सिंह को अमेरिका का राजदूत बनाए जाने पर भी ऐसा दर्जा दिया गया था।


जब त्रिवेदी ढाका पहुंचे, उसी समय बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान बीजिंग की यात्रा पर थे। रहमान ने चीन को मंगला बंदरगाह देने का वादा किया है। पिछले साल मोहम्मद यूनुस की सरकार ने मंगला बंदरगाह को भारत को देने का निर्णय रद्द कर दिया था, जिसके बाद बांग्लादेश ने चीन को अपना सहयोगी बना लिया है।


मंगला पोर्ट भारत की सीमा से केवल 80 किलोमीटर दूर है, और चीन का वहां आना भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से चिंता का विषय है। इसके अलावा, चीन ने बांग्लादेश के साथ अन्य समझौतों पर भी चर्चा की है, जिसमें बांग्लादेश और म्यांमार के बीच एक कॉरिडोर बनाने की योजना शामिल है। यह भी भारत के लिए एक नई चुनौती प्रस्तुत करता है।


सूत्रों के अनुसार, चीन ने बांग्लादेश से यह वादा किया है कि वह उसे ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का सदस्य बनवाने में मदद करेगा। इस प्रकार, चीन ने भारत के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।