दिया मिर्ज़ा की फिल्म 'पन्हा' ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैलाया
दिया मिर्ज़ा का पर्यावरण के प्रति समर्पण
प्रसिद्ध अभिनेत्री और पर्यावरण संरक्षण की सक्रिय समर्थक दिया मिर्ज़ा ने यह स्पष्ट किया है कि मनुष्य और प्रकृति का संबंध अटूट है। उन्होंने कहा कि धरती ही हमारी असली पहचान है। दिया मिर्ज़ा द्वारा निर्मित लघु फिल्म 'पन्हा' को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सराहना मिली है। इस फिल्म को ऑल लिविंग थिंग्स एनवायरमेंटल फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ भारतीय लघु फिल्म का पुरस्कार मिला है। इसके अलावा, इसे हैदराबाद में आयोजित नौवें वर्ल्ड इंडियन फिल्म फेस्टिवल में भी सर्वश्रेष्ठ फिल्म का खिताब मिला है।
फिल्म 'पन्हा' एक सात वर्षीय बच्चे विठू की नजर से एक परिवार की कहानी बयां करती है, जिसका पुश्तैनी आम का बाग एक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना के कारण खतरे में है। यह फिल्म विकास, विस्थापन और प्रकृति के साथ मानवीय रिश्तों को संवेदनशीलता के साथ दर्शाती है।
दिया मिर्ज़ा ने अपने समर्थन के बारे में कहा कि उनका प्रकृति से जुड़ाव बचपन से है। उन्होंने बताया कि उनके घर के पीछे का एक बड़ा आम का पेड़ उनके लिए सुकून और सुरक्षा का प्रतीक था। इस अनुभव ने उन्हें यह समझने में मदद की कि मनुष्य प्रकृति का अभिन्न हिस्सा है।
उन्होंने यह भी कहा कि मिस इंडिया बनने के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया, लेकिन मध्य प्रदेश के पेंच जंगल की यात्रा ने उन्हें फिर से प्रकृति के करीब ला दिया। जंगल में बिताए समय और स्थानीय समुदायों के साथ संवाद ने उन्हें जीवन का उद्देश्य समझाया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।
दिया ने कहा, "हम इस धरती से जुड़े हैं। हम प्रकृति का हिस्सा हैं, उससे अलग नहीं हैं। हमारी जिंदगी की हर जरूरत हमें इसी धरती से मिलती है और यही धरती हमें अपनी गोद में संभालकर रखती है।"
साक्षी मिश्रा के निर्देशन में बनी 'पन्हा' वन इंडिया स्टोरीज़ के बैनर तले निर्मित है। यह दिया मिर्ज़ा और उनकी बचपन की मित्र अनन्या राणे के बीच पहली रचनात्मक साझेदारी भी है। फिल्म महाराष्ट्र के आम के बागानों की पृष्ठभूमि में प्रकृति, परिवार और अपनेपन की भावनात्मक कहानी प्रस्तुत करती है।