दिल्ली उच्च न्यायालय ने 6 सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का आदेश दिया
दिल्ली उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय
नई दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने छह सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक आईआरएस अधिकारी की बर्खास्तगी को चुनौती देने से संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय के साथ पत्राचार में जानबूझकर गलत जानकारी प्रस्तुत की।
न्यायमूर्ति मधु जैन की एकल पीठ ने भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल द्वारा दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। अग्रवाल ने राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) के उस निर्णय को चुनौती दी थी, जिसमें सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 340 के तहत कार्रवाई शुरू करने से इनकार किया गया था।
उच्च न्यायालय ने विशेष न्यायाधीश को सुशील दीवान, विनीत विनायक, अमित कुमार, रमन त्यागी, प्रेम कुमार गौतम और मोहम्मद आजाद के खिलाफ आईपीसी की धारा 191, 193 और 209 के तहत कथित अपराधों के लिए लिखित शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने यह भी कहा कि शिकायत की प्रति आदेश प्राप्त होने के चार सप्ताह के भीतर संबंधित मजिस्ट्रेट के पास भेजी जाए। यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आय से अधिक संपत्ति के आरोपों में सीबीआई द्वारा अशोक कुमार अग्रवाल के खिलाफ चलाए गए अभियोजन से संबंधित है, जो 26 नवंबर 2002 को जारी स्वीकृति आदेश पर आधारित है।
2016 में हाईकोर्ट ने दी थी मंजूरी को रद्द
जनवरी 2016 में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने अग्रवाल के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी को अमान्य कर दिया था। इसके बाद मार्च 2016 में विशेष न्यायाधीश ने उन्हें मामले में बरी कर दिया। इस फैसले के बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती देने की संभावना पर विचार किया।
8 जून 2016 को कानून एवं न्याय मंत्रालय ने अपनी कानूनी राय में कहा था कि इस मामले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है। यह राय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के माध्यम से 1 जुलाई 2016 को सीबीआई को भेजी गई थी। इसके बाद अग्रवाल ने जांच के दौरान सीबीआई द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों को वापस करने की मांग की।
सीबीआई के जवाब से उत्पन्न विवाद
सीबीआई ने 2 अगस्त 2016 को अदालत में दाखिल जवाब में कुछ दस्तावेज लौटाने का विरोध किया। एजेंसी ने कहा कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक मंत्रालय के साथ पत्राचार चल रहा है।
इस जवाब के बाद विशेष न्यायाधीश ने सीबीआई को स्पष्ट रूप से बताने का निर्देश दिया कि क्या मामले में कोई अपील या पुनरीक्षण याचिका दायर की गई है या लंबित है।
इसके बाद अग्रवाल ने 8 अगस्त 2016 को सीआरपीसी की धारा 340 के तहत आवेदन दाखिल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई का जवाब तथ्यात्मक रूप से गलत था, क्योंकि उस समय प्रशासनिक मंत्रालय के साथ कोई वास्तविक पत्राचार नहीं हुआ था। उनका यह भी कहना था कि सीबीआई को कानून एवं न्याय मंत्रालय से पहले ही मामले को उच्च अदालत में आगे नहीं ले जाने की राय मिल चुकी थी।
हाईकोर्ट ने पत्राचार की समयसीमा पर उठाए सवाल
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड की जांच के बाद पाया कि सीबीआई ने 8 अगस्त 2016 को ही डीओपीटी को मामले पर पुनर्विचार करने और आगे कानूनी राय लेने का प्रस्ताव भेजा था।
इसके अगले दिन, 9 अगस्त को दाखिल अतिरिक्त जवाब में सीबीआई ने कहा कि उसने जनवरी 2016 के फैसले को चुनौती देने का सैद्धांतिक निर्णय लिया था और इस संबंध में प्रस्ताव 8 अगस्त को संबंधित विभाग को भेजा गया था।
इसी घटनाक्रम को देखते हुए हाईकोर्ट ने छह अधिकारियों के खिलाफ कथित तौर पर अदालत को गलत जानकारी देने के मामले में आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया।