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दिल्ली-एनसीआर में पाकिस्तान के लिए जासूसी: 6 संदिग्ध गिरफ्तार

दिल्ली-एनसीआर में एक गंभीर जासूसी नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। ये लोग दिल्ली और आसपास के संवेदनशील स्थलों की तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तान भेजते थे। पुलिस ने इनकी गतिविधियों की जानकारी स्थानीय लोगों से प्राप्त की थी। जांच में पता चला है कि आरोपियों ने पिछले एक साल में कई महत्वपूर्ण स्थलों की जानकारी साझा की थी। इस मामले में महिला की भी महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही हैं।
 

सुरक्षा से जुड़ी साजिश का खुलासा


नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में सुरक्षा से संबंधित एक गंभीर साजिश का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने गाजियाबाद के कौशांबी क्षेत्र से छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिन पर आरोप है कि वे दिल्ली और उसके आस-पास के संवेदनशील स्थलों की तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तान भेज रहे थे। गिरफ्तार किए गए लोगों में एक महिला भी शामिल है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि ये लोग पिछले एक साल से पाकिस्तान में अपने संपर्कों को लगातार जानकारी भेज रहे थे। पुलिस को इन संदिग्धों के बारे में पहले से सूचना प्राप्त थी।


गिरफ्तारी की प्रक्रिया

शनिवार सुबह गुप्त सूचना के आधार पर भोवापुर तिराहे के पास छापा मारकर पांच लोगों को पकड़ा गया। गिरफ्तार आरोपियों में मेरठ के परतापुर निवासी सुहेल मलिक और भोवापुर के प्रवीन, राज, शिवा और रितिक शामिल हैं। पूछताछ के बाद पुलिस ने आनंद विहार बॉर्डर के पास से संभल की रहने वाली साने इरम उर्फ महक को भी गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि यह महिला भी इस नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही थी।


मोबाइल में मिले संवेदनशील स्थानों के वीडियो

पुलिस को आरोपियों के पास से आठ मोबाइल फोन मिले हैं। इन मोबाइलों की जांच में दिल्ली के कई महत्वपूर्ण स्थलों के फोटो और वीडियो मिले हैं, जिनमें रेलवे स्टेशन, सैन्य ठिकाने और सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े कार्यालय शामिल हैं। जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों ने पिछले एक साल में 20 से अधिक संवेदनशील स्थलों के करीब 50 वीडियो और कई तस्वीरें पाकिस्तान भेजी थीं।


आईपी सोलर कैमरों का उपयोग

आरोपियों ने दिल्ली के कुछ स्थानों पर आईपी सोलर कैमरे लगाए थे। इन कैमरों के माध्यम से वे वहां की लाइव वीडियो फुटेज पाकिस्तान में बैठे लोगों तक पहुंचा रहे थे। अब तक एक ऐसे स्थान का पता चला है जहां कैमरा लगाया गया था। इस संबंध में दिल्ली पुलिस को भी जानकारी दे दी गई है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ऐसे कैमरे और किन-किन जगहों पर लगाए गए थे।


पाकिस्तान से मिलने वाले पैसे

पुलिस के अनुसार, पाकिस्तान से मांग आने पर आरोपी तय स्थानों पर जाकर फोटो और वीडियो बनाते थे। इसके बदले उन्हें प्रति लोकेशन लगभग पांच से आठ हजार रुपये तक मिलते थे। जांच में अब तक एक ही पाकिस्तानी नंबर सामने आया है, जिससे आरोपी संपर्क में थे। बातचीत ज्यादातर व्हाट्सऐप के माध्यम से होती थी। पुलिस का कहना है कि गिरोह का सरगना पाकिस्तान में बैठा है और वही सभी को अलग-अलग जगहों की जानकारी जुटाने का निर्देश देता था।


महिला की भूमिका

पुलिस का कहना है कि साने इरम गिरोह में दूसरे नंबर की भूमिका निभा रही थी। वह युवाओं से संपर्क कर उन्हें इस नेटवर्क से जोड़ने का काम करती थी। शुरुआत में लोगों से फोटो और वीडियो बनवाने के लिए कहा जाता था और उन्हें पैसे दिए जाते थे। बाद में वे बिना सवाल किए इस काम में शामिल हो जाते थे। जांच एजेंसियों को शक है कि इस गिरोह में कुछ और युवतियां भी शामिल हो सकती हैं।


खुफिया एजेंसियों की पूछताछ

मामले की गंभीरता को देखते हुए एटीएस, आईबी और स्थानीय खुफिया इकाइयों की टीमें भी मौके पर पहुंचीं। सभी आरोपियों से लंबी पूछताछ की गई। एजेंसियों ने यह जानने की कोशिश की कि वे कब से पाकिस्तान के संपर्क में थे और उनके नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है। आरोपियों के मोबाइल फोन अब फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जा रहे हैं, जिससे कई और अहम जानकारी सामने आ सकती है।


स्थानीय लोगों की सतर्कता

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की गतिविधियों पर आसपास रहने वाले लोगों को शक हो गया था। वे अक्सर अलग-अलग जगहों के फोटो और वीडियो बनाते थे और दूसरों को भी पैसे का लालच देकर इस काम में शामिल करने की कोशिश करते थे। स्थानीय लोगों ने इस बात की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सतर्कता से एक बड़ी साजिश को समय रहते रोक लिया गया।