दिल्ली के अल फलाह विश्वविद्यालय पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप: ED की जांच में चौंकाने वाले खुलासे
दिल्ली में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच
नई दिल्ली: नवंबर 2025 में दिल्ली के रेड फोर्ट के पास हुए बम विस्फोट से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय को संदेह के घेरे में रखा है। ED की चार्जशीट में विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली, नियुक्तियों और वित्तीय लेन-देन के बारे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि संस्थान ने नियमों का उल्लंघन किया और छात्रों तथा नियामकों को गुमराह किया।
संदिग्ध डॉक्टरों की नियुक्ति बिना सत्यापन
जांच में यह पाया गया कि विश्वविद्यालय ने तीन ऐसे डॉक्टरों को नियुक्त किया, जिनका संबंध रेड फोर्ट धमाके से जोड़ा गया है। इन नियुक्तियों के समय न तो पुलिस सत्यापन किया गया और न ही किसी प्रकार की पृष्ठभूमि जांच की गई। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने भी स्वीकार किया कि मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की भर्ती बिना पुलिस जांच के की जाती थी, जो गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
कागजों पर मौजूद डॉक्टर
चार्जशीट के अनुसार, कई डॉक्टर केवल कागजों पर मौजूद थे ताकि मेडिकल काउंसिल से आवश्यक मंजूरी प्राप्त की जा सके। इन्हें सीमित उपस्थिति या हफ्ते में दो दिन काम करने वाले शिक्षकों के रूप में दर्शाया गया। ED का कहना है कि ये डॉक्टर न तो नियमित रूप से पढ़ाते थे और न ही अस्पताल में मरीजों का इलाज करते थे। इसका मुख्य उद्देश्य केवल मान्यता बनाए रखना था।
निरीक्षण से पहले नकली मरीजों की भर्ती
जांच एजेंसी ने संदेशों और वीडियो कॉल के साक्ष्यों के आधार पर यह दावा किया है कि निरीक्षण से ठीक पहले अस्पताल में नकली मरीज भर्ती किए जाते थे। सामान्य दिनों में अस्पताल लगभग खाली रहता था। ED के अनुसार, निरीक्षण के समय अस्थायी डॉक्टरों को बुलाया जाता था ताकि संस्थान को पूरी तरह से कार्यरत दिखाया जा सके और नियामक संस्थाओं को भ्रमित किया जा सके।
आतंक से जुड़े डॉक्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया
विश्वविद्यालय की कुलपति और प्राचार्य ने ED को बताया कि विवादित डॉक्टरों की नियुक्ति उनके कार्यकाल में हुई थी। ये नियुक्तियां मानव संसाधन विभाग की सिफारिश पर हुईं और अंतिम मंजूरी विश्वविद्यालय के चेयरमैन ने दी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि किसी भी स्तर पर पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों से सत्यापन नहीं कराया गया, जिससे सवाल और गहरे हो गए हैं।
493 करोड़ की कथित कमाई और विदेशी कनेक्शन
ED ने इस मामले में कथित अपराध की आय 493.24 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया है, जो छात्रों से झूठे दावों के आधार पर वसूली गई। एजेंसी ने चेयरमैन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है। इसके साथ ही, उनके बच्चों के संभावित विदेशी नागरिकता संबंधी दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं। इस पूरे मामले में और खुलासों की संभावना जताई जा रही है।