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दिल्ली के एम्स में 15 वर्षीय तन्वी की दुखद मौत: परिवार ने उठाए गंभीर सवाल

राजस्थान के कोटा की 15 वर्षीय तन्वी की दिल्ली के एम्स में मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में इलाज के दौरान कई बार सर्जरी की तारीखें तय की गईं, लेकिन ऑपरेशन नहीं हो सका। डॉक्टरों ने उसकी बीमारी के बारे में जानकारी दी, लेकिन परिवार को संतोषजनक उत्तर नहीं मिले। जानें इस दुखद घटना के पीछे की पूरी कहानी और परिवार की मांगें।
 

तन्वी की बीमारी और इलाज का सफर


नई दिल्ली: राजस्थान के कोटा की 15 वर्षीय तन्वी की मंगलवार सुबह दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। तन्वी को जन्म से ही हृदय संबंधी समस्या थी और वह लगभग दो साल की उम्र से एम्स में इलाज करा रही थी। जानकारी के अनुसार, उसे अस्पताल में भर्ती होने के दो हफ्ते पहले ही लाया गया था। तन्वी के पिता, मुकेश परियानी, ने बताया कि उनकी बेटी की सर्जरी के लिए कई बार तारीखें तय की गईं, लेकिन ऑपरेशन नहीं हो सका। 18 अगस्त को इस मामले में एक रिपोर्ट भी आई थी, जिसमें परिवार ने लंबे समय से चल रहे इलाज की कठिनाइयों का जिक्र किया था।


बीमारी का पता और इलाज की प्रक्रिया

अस्पताल में भर्ती होने के बाद, डॉक्टर तन्वी के हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावनाओं की जांच कर रहे थे। एम्स के चिकित्सक डॉ. वी. देवागोरौ के अनुसार, तन्वी को 2012 में VSD और पल्मोनरी एट्रेसिया का पता चला था। 2013 में उसकी सर्जरी की संभावनाओं पर विचार किया गया, लेकिन 2018 में डॉक्टरों ने सुधारात्मक सर्जरी को उचित नहीं माना और दवाओं के माध्यम से इलाज जारी रखा गया।


डॉक्टरों के अनुसार, 24 अगस्त को तन्वी को हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट के लिए जांच के लिए भर्ती किया गया था। सोमवार को उसकी एंडोस्कोपी भी की गई थी। इसके कुछ घंटों बाद, मंगलवार तड़के लगभग 2:50 बजे उसकी स्थिति अचानक बिगड़ गई। उसे कमजोरी महसूस हुई और उसका शरीर नीला पड़ने लगा। उसका ऑक्सीजन स्तर 48 प्रतिशत तक गिर गया।


अस्पताल में हुई घटनाएं

सुबह लगभग 3:30 बजे उसे ऑक्सीजन दी गई, लेकिन कुछ समय बाद ऑक्सीजन की कमी के कारण उसे कार्डियक अरेस्ट आया। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सुबह 5:06 बजे उसकी मृत्यु हो गई। तन्वी के पिता ने अस्पताल से कई सवाल पूछे हैं। उनका आरोप है कि अस्पताल के कर्मचारियों ने उनसे बार-बार दस्तावेज मांगे और कुछ मौकों पर अस्पताल से छुट्टी लेने के लिए भी कहा। उन्होंने अब अपनी बेटी की मौत की जांच की मांग की है और फिलहाल उन्होंने अस्पताल से बेटी का शव भी नहीं लिया है।


परिवार ने यह भी सवाल उठाया है कि 2013 में सर्जरी के लिए जांच के बाद ऑपरेशन क्यों नहीं हुआ और 2018 में सर्जरी को क्यों रोका गया। इन सवालों पर एम्स की ओर से अभी तक विस्तृत जवाब नहीं दिया गया है। हालांकि, परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।