दिल्ली कोर्ट ने 'साउथ ग्रुप' लेबल पर उठाए सवाल, सीबीआई को दी चेतावनी
विशेष अदालत की कड़ी टिप्पणी
दिल्ली की एक विशेष अदालत ने सीबीआई द्वारा कथित आबकारी नीति घोटाले में 'साउथ ग्रुप' शब्द के बार-बार उपयोग पर कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने कहा कि इस तरह का क्षेत्रीय लेबल लगाना अनुचित और मनमाना है।
आरोपियों को मिली राहत
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज जितेंद्र सिंह ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के कविता सहित सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त करते हुए कहा कि 'साउथ' जैसे शब्द का कानूनी आधार नहीं है और यह किसी वैधानिक वर्गीकरण से मेल नहीं खाता।
चुनिंदा वर्गीकरण पर सवाल
कोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष ने अन्य आरोपियों के लिए कोई समान क्षेत्रीय पहचान, जैसे 'नॉर्थ ग्रुप', का उपयोग नहीं किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह वर्गीकरण चयनात्मक और आधारहीन है।
पूर्वाग्रह की आशंका
अदालत ने कहा कि यह केवल शब्दों का मामला नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय पहचान पर आधारित लेबलिंग से पूर्वाग्रह की आशंका उत्पन्न होती है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आपराधिक कार्यवाही साक्ष्य-आधारित और निष्पक्ष होनी चाहिए।
संविधान के सिद्धांतों का उल्लंघन
जज जितेंद्र सिंह ने कहा कि जातीयता, राष्ट्रीयता या क्षेत्रीय मूल के आधार पर किसी आरोपी को चिह्नित करना तब तक अस्वीकार्य है जब तक उसका कथित अपराध से कोई तार्किक संबंध न हो। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 15 के सिद्धांतों के विपरीत है।
सीबीआई को दी गई सलाह
जज ने कहा कि पहचान-आधारित संज्ञाएं न केवल अनुचित हैं, बल्कि कार्यवाही की निष्पक्षता को भी प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए सीबीआई को आरोपपत्र और जांच विवरण तैयार करते समय भाषा के चयन में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
घोटाले में शामिल लोग
इस घोटाले में जिन लोगों का नाम शामिल है, उनमें से अधिकांश दक्षिण भारत से हैं, जैसे के. कविता और मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी। आरोप है कि 'साउथ ग्रुप' ने आप नेताओं को विजय नायर के माध्यम से 100 करोड़ की रिश्वत दी थी।