×

दिल्ली छात्र प्रदर्शन मामले में पुलिस का सुप्रीम कोर्ट में स्पष्टीकरण

दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर उठे सवालों पर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। पुलिस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शन की शुरुआत शांतिपूर्ण थी, लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया। इस दौरान 240 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। जानें इस मामले में पुलिस का क्या कहना है और प्रदर्शन के दौरान की स्थिति के बारे में पूरी जानकारी।
 

दिल्ली छात्र प्रदर्शन पर पुलिस का पक्ष


दिल्ली छात्र प्रदर्शन मामले की जानकारी: दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवालों का जवाब देते हुए, दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शन की शुरुआत शांतिपूर्ण थी, लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिससे स्थिति बिगड़ गई।


पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन स्थल पर लगभग 30,000 लोग थे, जबकि उन्हें नियंत्रित करने के लिए केवल 5,000 पुलिसकर्मी तैनात थे। इस दौरान 240 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि लगभग 200 प्रदर्शनकारी भी चोटिल हुए। डीसीपी सचिन शर्मा द्वारा प्रस्तुत हलफनामे में कहा गया है कि प्रदर्शन की शुरुआत शांतिपूर्ण थी, लेकिन बाद में भीड़ ने बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया।


पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि संसद की ओर मार्च की अनुमति नहीं थी, इसलिए आगे बढ़ रही भीड़ को गैरकानूनी माना गया। जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, तो पुलिस ने क्रमिक तरीके से बल का प्रयोग किया।


दिल्ली पुलिस ने याचिकाओं में लगाए गए अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों को अस्वीकार किया है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उनकी कार्रवाई को एकतरफा नहीं देखा जा सकता। पुलिस ने यह भी बताया कि प्रदर्शन में कुछ ऐसे लोग शामिल थे जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।


पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान कील लगी लाठियों के इस्तेमाल का आरोप गलत है। वीडियो में दिख रहा डंडा एक प्रदर्शनकारी के हाथ में था, न कि पुलिसकर्मी के।


सादे कपड़ों में लाठी लेकर मौजूद अधिकारियों के बारे में पुलिस ने बताया कि ये अधिकारी 'स्पॉटर' के रूप में तैनात थे। पुलिस ने कहा कि यह सामान्य रणनीति है। इसके अलावा, पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन स्थल पर 2,873 लोगों के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें गंभीर अपराध शामिल हैं।