दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला
नई दिल्ली: 2020 में दिल्ली में हुए दंगों के बड़े षड्यंत्र से जुड़े मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। कोर्ट ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। यह तीसरी बार है जब हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को अस्वीकृत किया है। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस अमित शर्मा की बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि वे सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी के आदेश में कोई बदलाव नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा, "हम सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश के आधार पर इस समय जमानत नहीं दे सकते।"
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को कहा था कि दोनों आरोपी या तो संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद या एक साल के आदेश के पूरा होने पर, जो भी पहले हो, जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि वह इसी आदेश के तहत बंधी हुई है।
UAPA के तहत मामला
उमर खालिद और शरजील इमाम पर UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन पर 2020 में दिल्ली में हुए दंगों की साजिश रचने का आरोप है, जिसमें 53 लोगों की जान गई और 700 से अधिक लोग घायल हुए। यह मामला CAA और NRC के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से संबंधित है। दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में जमानत का विरोध करते हुए दोनों को दंगों का मुख्य साजिशकर्ता बताया है। पुलिस का कहना है कि उनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
गिरफ्तारी का विवरण
शरजील इमाम को 25 अगस्त 2020 को और उमर खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। तब से दोनों जेल में हैं। इससे पहले, 4 जुलाई को निचली अदालत ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। निचली अदालत ने कहा था कि उसके पास सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
इसी मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को सह-आरोपी गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान और अन्य को राहत देते हुए जमानत दी थी, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है, यह टिप्पणी की थी। बाद में 22 मई को सुप्रीम कोर्ट ने दो अन्य आरोपियों तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को छह महीने की अंतरिम जमानत दी थी।