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दिल्ली पुलिस के घायल जवानों के परिवारों ने न्याय की मांग की

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने मीडिया के सामने अपने अनुभव साझा करते हुए न्याय की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर हिंसक हमले हुए और उनकी पीड़ा को नजरअंदाज किया गया। परिवारों ने यह भी कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। जानें इस मामले में परिवारों की क्या मांगें हैं और उन्होंने सांसदों से क्या अपील की।
 

CJP प्रदर्शन पर घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की आवाज़


दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित CJP प्रदर्शन के संदर्भ में एक नया दृष्टिकोण सामने आया है। प्रदर्शन के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिस के जवानों के परिवारों ने मीडिया के सामने अपने अनुभव साझा करते हुए न्याय की मांग की। परिजनों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों पर हिंसक हमले हुए, लेकिन उनकी पीड़ा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने बताया कि उनके परिवार के सदस्य कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात थे। उनका कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने अचानक हिंसक रुख अपनाया और पुलिस पर हमला कर दिया। परिवारों ने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में दोनों पक्षों को समान रूप से सुना जाना चाहिए।


'पापा की वर्दी खून से सनी थी'

एक घायल एसीपी के बेटे ने भावुक होकर बताया कि जब उन्होंने अपने पिता को देखा, तो उनकी वर्दी खून से भरी हुई थी। उन्होंने कहा कि इलाज के लिए उनके सिर के बाल काटने पड़े और सिर पर चार टांके लगे थे। बेटे के अनुसार, उनके पिता ने बताया कि भीड़ में असामाजिक तत्व शामिल हो गए थे और अचानक पथराव शुरू हो गया, जिससे पुलिसकर्मियों को संभलने का मौका नहीं मिला।


'यह सिर्फ छात्रों का प्रदर्शन नहीं रह गया था'

एक अन्य पुलिस अधिकारी के बेटे कुंजल ने कहा कि उनके पिता जंतर-मंतर पर बैरिकेडिंग के पास तैनात थे। वह रोज घर लौटकर बताते थे कि प्रदर्शन का स्वरूप बदल रहा है और भीड़ में असामाजिक तत्व शामिल हो चुके हैं। अगले दिन उनके पिता घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। परिवार का कहना है कि ड्यूटी निभाने वाले पुलिसकर्मियों को अपराधी की तरह नहीं दिखाया जाना चाहिए।


पत्थर, गमले, जूते और चप्पलों से हमले का आरोप

दिल्ली पुलिस के एक एएसआई की पत्नी सीमा ने बताया कि उनके पति 20 जुलाई को ड्यूटी पर गए थे। शाम को उन्हें पता चला कि उन्हें इलाज के लिए एलएनजेपी अस्पताल ले जाया गया है। उनके अनुसार, भीड़ ने पुलिस पर पत्थर, फूलों के गमले, जूते और चप्पल फेंके। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पति का सुरक्षा हेलमेट भी पूरी तरह टूट गया था।


संसद तक बढ़ने की कोशिश का भी दावा

परिजनों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की और संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया। उनका आरोप है कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभा रहे थे, लेकिन उन पर हिंसक हमला हुआ। परिवारों ने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।


पुलिस परिवारों ने संसद से लगाई गुहार

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद परिवारों ने सांसदों से अपील की कि ड्यूटी के दौरान घायल होने वाले पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की समस्याओं पर भी संसद में चर्चा हो। उनका कहना है कि अब तक सार्वजनिक विमर्श में केवल एक पक्ष सामने आया है, जबकि घायल पुलिसकर्मियों के साथ जो हुआ, उसे भी समान महत्व मिलना चाहिए। उन्होंने न्याय और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग दोहराई।