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दिल्ली पुलिस ने 26 साल बाद किया सलीम वास्तिक को गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने 26 साल बाद सलीम वास्तिक को गिरफ्तार किया, जो एक हत्या के मामले में फरार था। सलीम, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय था, ने अपनी पहचान बदलकर गांव में अपनी मौत की अफवाह फैलाई थी। उसकी गिरफ्तारी की कहानी में कई चौंकाने वाले मोड़ हैं, जिसमें उसकी गलती से पुलिस को उसकी पहचान का पता चला। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और सलीम की गिरफ्तारी के पीछे की वजह।
 

सलीम वास्तिक की गिरफ्तारी

दिल्ली पुलिस ने गाजियाबाद से सलीम वास्तिक को गिरफ्तार किया है, जिसे पिछले 26 वर्षों से खोजा जा रहा था। यह जानकर हैरानी होती है कि सलीम वास्तिक सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय था और उसके सैकड़ों वीडियो उपलब्ध थे, फिर भी पुलिस उसे पहचान नहीं पाई। हालाँकि, एक गलती ने उसे फिर से सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।


सलीम का असली नाम और अपराध

सलीम वास्तिक का असली नाम सलीम खान है, और वह उत्तर प्रदेश के शामली जिले के नानूपुरा गांव का निवासी है। उसने 1995 में दिल्ली के गोकुलपुरी में अपने साथी के साथ मिलकर 13 वर्षीय संदीप बंसल का अपहरण किया था। उसने बच्चे के पिता से 30,000 रुपये की फिरौती मांगी, लेकिन पैसे न मिलने पर उसने बच्चे की हत्या कर दी और शव को नाले में फेंक दिया।


अपहरण और हत्या का मामला

संदीप बंसल दरियागंज के रामजस स्कूल में पढ़ता था, जहां सलीम खान मार्शल आर्ट्स का प्रशिक्षक था। उसने अपने दोस्त अनिल के साथ मिलकर इस अपराध की योजना बनाई थी। 1997 में, दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई। 2000 में, सलीम को जमानत मिली, और जेल से बाहर आने के बाद उसने अपनी पहचान बदल ली और गांव में अपनी मौत की अफवाह फैला दी।


गांव में वापसी और गिरफ्तारी

सलीम ने पिछले 26 वर्षों में अपने गांव का दौरा नहीं किया, जिससे गांव वालों को उसकी मौत पर विश्वास हो गया। लेकिन दिसंबर 2025 में, उसने अपनी पुश्तैनी जमीन बेचने के लिए गांव का दौरा किया, जिससे सभी लोग हैरान रह गए। जब दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने नानूपुरा का दौरा किया, तो एक बुजुर्ग ने सलीम के जीवित होने की जानकारी दी।


पुलिस की कार्रवाई

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के उपायुक्त संजीव यादव ने बताया कि इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी को सूचना मिली कि लोनी में रहने वाला सलीम वास्तिक एक हत्या के मामले में दोषी है और जमानत मिलने के बाद से फरार है। इसके बाद पुलिस ने उसके बैकग्राउंड की जांच की और पुराने रिकॉर्ड से उसकी तस्वीरें निकालीं। फिंगरप्रिंट मिलान के बाद उसे गिरफ्तार किया गया।