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दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके को रिहा किया, विवाद जारी

दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके को 23 घंटे की हिरासत के बाद रिहा कर दिया, लेकिन उनके और पुलिस के बीच विवाद जारी है। दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके फोन को कई घंटों तक अपने पास रखा और सबूतों को प्लांट करने की आशंका जताई। इस बीच, सीजेपी के प्रवक्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पुलिस ने संवेदनशीलता के साथ मदद की पेशकश की। जानें इस मामले में और क्या हुआ।
 

अभिजीत दीपके की रिहाई और विवाद


नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को 23 घंटे की हिरासत के बाद रविवार सुबह रिहा कर दिया। रिहाई के बाद, दीपके अपने परिवार के पास महाराष्ट्र चले गए, क्योंकि उनकी दादी का निधन हो गया था। इस बीच, दीपके और दिल्ली पुलिस के बीच कई मुद्दों पर विवाद उत्पन्न हो गया है। दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके फोन को कई घंटों तक अपने पास रखा और उन्हें आशंका है कि सबूतों को प्लांट किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब वे अपने कजिन का नंबर निकालने के लिए फोन मांग रहे थे, तब पुलिस ने उस समय की वीडियो क्लिप को डिलीट कर दिया।


सीजेपी के प्रवक्ताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जब अभिजीत दीपके को उनकी दादी के निधन की सूचना दी गई, तब भी दिल्ली पुलिस कैमरा और माइक लेकर वहां पहुंच गई थी। उन्होंने बताया कि दीपके ने बार-बार पुलिस से अपने कजिन से बात करने की गुहार लगाई, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। रिहाई के बाद, दीपके कपिल सिब्बल से मिलने गए और फिर महाराष्ट्र लौट गए। उन्होंने कहा, 'मेरी दादी का निधन हो गया है, इसलिए मैं अपने परिवार के साथ रहने जा रहा हूं।'


दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जैसे ही उन्हें अभिजीत दीपके की दादी के निधन की सूचना मिली, वे संवेदनशीलता के साथ उनके पास पहुंचे और हर संभव मदद की पेशकश की। पुलिस ने कहा, 'दीपके से लगातार पूछा गया कि क्या वे अपने माता-पिता से बात करना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्हें सोचने का समय भी दिया गया। फिर से मदद के लिए पूछा गया। सीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस तथ्य को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।'