×

दिल्ली पुलिस ने तुर्कमान गेट हिंसा में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया

दिल्ली पुलिस ने तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुई हिंसा के मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी के साथ, कुल गिरफ्तारियों की संख्या 12 हो गई है। पुलिस ने बताया कि आरोपी पत्थरबाजी में शामिल था और इस मामले में 30 अन्य संदिग्धों की पहचान की गई है। जांच में समाजवादी पार्टी के सांसद को भी समन भेजने की योजना है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और पुलिस की कार्रवाई के बारे में।
 

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने तुर्कमान गेट क्षेत्र में फैज-ए-इलाही मस्जिद के निकट हुई हिंसा के मामले में एक और संदिग्ध को गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी के साथ, इस मामले में अब तक कुल 12 आरोपियों को पकड़ा जा चुका है।


पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान मोहम्मद इमरान उर्फ राजू (36) के रूप में हुई है। अधिकारियों का कहना है कि वह पत्थरबाजी और हिंसा की घटनाओं में शामिल था। पर्याप्त सबूत मिलने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। इससे पहले, पुलिस ने बुधवार को 5 और गुरुवार को 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।


जानकारी के अनुसार, नगर निगम की टीम जब फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने का कार्य कर रही थी, तभी कुछ असामाजिक तत्वों ने पथराव शुरू कर दिया। इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी घायल हुए और सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा।


दिल्ली पुलिस ने पहले बताया था कि उन्होंने हिंसा में शामिल 30 लोगों की पहचान की है। यह पहचान सीसीटीवी फुटेज, पुलिसकर्मियों के बॉडी-वॉर्न कैमरे की रिकॉर्डिंग और इलाके में वायरल वीडियो के आधार पर की गई। अधिकारियों का कहना है कि समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को भी जांच में शामिल होने के लिए समन भेजा जाएगा, क्योंकि वह घटनास्थल पर मौजूद थे।


पुलिस के अनुसार, अधिकारियों ने सांसद से घटनास्थल से दूर रहने का अनुरोध किया था, लेकिन वह घटना से पहले उस क्षेत्र में बने रहे। इसके अलावा, पुलिस ने यूट्यूबर सलमान की तलाश भी तेज कर दी है, जिस पर आरोप है कि उसने सोशल मीडिया का उपयोग करके शांति भंग करने की कोशिश की। सलमान पर आरोप है कि उसने स्थानीय लोगों को घटनास्थल पर इकट्ठा होने के लिए बुलाया।


जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों ने अपने व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से निवासियों को इकट्ठा होने के लिए उकसाया। पुलिस का कहना है कि उनका उद्देश्य ऑपरेशन के दौरान अशांति फैलाना और प्रशासन के काम में बाधा डालना था।


एफआईआर में दर्ज घटनाक्रम में पुलिस की बैरिकेडिंग से लेकर स्थानीय लोगों द्वारा भड़काऊ नारे लगाने और पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंकने तक की घटनाएं शामिल हैं। एफआईआर के अनुसार, करीब 12:40 बजे जब पुलिस ने बैरिकेडिंग शुरू की, तभी 30-35 लोगों का एक समूह मौके पर एकत्र हो गया और नारे लगाने लगा, जिससे पुलिस को नाकाबंदी करने में कठिनाई हुई।