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दिल्ली में 33 लाख मतदाताओं को नोटिस, आडवाणी और सिसोदिया भी शामिल

दिल्ली में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान 33 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है, जिसमें पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शामिल हैं। यह नोटिस रिकॉर्ड में विसंगतियों के कारण भेजा गया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और क्या है इसके पीछे का कारण।
 

दिल्ली में मतदाता सूची की विसंगतियाँ


नई दिल्ली. देशभर में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की चर्चा जोरों पर है। दिल्ली में इस प्रक्रिया के तहत पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को चुनाव आयोग द्वारा नोटिस जारी किया गया है। इस सूची में इन दोनों के अलावा अन्य प्रमुख मतदाताओं के नाम भी शामिल हैं, जिनकी संख्या 33.13 लाख बताई जा रही है। यह नोटिस रिकॉर्ड में विसंगतियों के कारण जारी किया गया है।


विशेष गहन पुनरीक्षण के परिणामों ने सभी को चौंका दिया है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, आडवाणी को नोटिस भेजना एक अप्रत्याशित कदम था। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि नोटिस का आना मतदाता सूची से नाम हटाने का अंतिम निर्णय नहीं है। नियमों के अनुसार, दस्तावेजों और तथ्यों के सत्यापन के बाद योग्य नामों को अंतिम सूची में शामिल किया जाएगा।


भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी के साथ उनकी बेटी प्रतिभा और बहू गीतिका के नाम 2002 की पिछली SIR मतदाता सूची से मेल नहीं खा सके, जिसके बाद नोटिस भेजने का निर्णय लिया गया। वहीं, उनके बेटे जयंत का रिकॉर्ड सत्यापित हो गया है। आडवाणी परिवार के सभी सदस्य नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं।


मनीष सिसोदिया की पत्नी सीमा और बेटे मीर को भी नोटिस मिला है। अधिकारियों के अनुसार, मीर के रिकॉर्ड में माता-पिता के नाम से जुड़ी गड़बड़ी और सीमा के मामले में उनके अपने नाम में अंतर पाया गया। सिसोदिया को नोटिस दिए जाने का कारण अभी स्पष्ट नहीं किया गया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का नाम भी नोटिस पाने वाले प्रमुख मतदाताओं में शामिल है। रेखा गुप्ता के रिकॉर्ड का सत्यापन हो चुका है और उनका नाम अंतिम वोटर सूची में शामिल किया जाएगा।