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दिल्ली में E20 पेट्रोल के खिलाफ कार मालिकों का प्रदर्शन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कार मालिकों ने E20 पेट्रोल के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने माइलेज में कमी और मरम्मत की बढ़ती लागत की शिकायत की। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से पारदर्शिता और उपभोक्ताओं की पसंद का सम्मान करने की मांग की। हालांकि, केंद्र सरकार और विशेषज्ञों ने E20 को सुरक्षित बताया है। इस प्रदर्शन ने E20 नीति पर नई बहस को जन्म दिया है।
 

E20 पेट्रोल के खिलाफ प्रदर्शन


दिल्ली के जंतर-मंतर पर रविवार को कार मालिकों ने राष्ट्रीय एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (E20) के खिलाफ प्रदर्शन किया। 'हमारी गाड़ी, हमारा अधिकार' के तहत आयोजित इस आंदोलन में लोगों ने आरोप लगाया कि E20 पेट्रोल के उपयोग से उनकी गाड़ियों का माइलेज घट गया है और कई वाहनों में फ्यूल सिस्टम से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। हालांकि, केंद्र सरकार और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ पहले ही इन दावों को खारिज कर चुके हैं और E20 को सुरक्षित बताया है।


माइलेज में कमी और मरम्मत की बढ़ती लागत

प्रदर्शन में शामिल कई वाहन मालिकों ने अपने अनुभव साझा किए। एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बताया कि उनकी 2018 मॉडल कार का माइलेज 18 किलोमीटर प्रति लीटर से घटकर 14 किलोमीटर प्रति लीटर से भी कम हो गया। एक अन्य कार मालिक ने कहा कि E20 पेट्रोल का उपयोग करने के बाद उनकी कार के फ्यूल सिस्टम में खराबी आ गई, जिसकी मरम्मत पर 35 हजार रुपये से अधिक खर्च करना पड़ा। कुछ लोगों ने इंजन चेतावनी लाइट जलने और गाड़ी बंद होने जैसे अनुभव भी साझा किए।


सरकार और विशेषज्ञों का स्पष्टीकरण

प्रदर्शनकारियों के आरोपों का जवाब देते हुए, केंद्र सरकार और ऑटो तथा ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने कहा है कि E20 पेट्रोल से वाहनों को नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी, किसानों की आय बढ़ेगी और प्रदूषण में कमी आएगी। भारत ने निर्धारित समय से पहले ही एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है, जिसे ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


उपभोक्ताओं की पसंद और पारदर्शिता की मांग

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्हें शुद्ध पेट्रोल और E20 के बीच चयन करने का विकल्प मिलना चाहिए। उनका आरोप है कि कई पुरानी गाड़ियां E20 के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि विभिन्न प्रकार के ईंधन उपलब्ध कराए जाएं तो उपभोक्ता अपनी आवश्यकताओं के अनुसार चुनाव कर सकते हैं। उन्होंने नीति लागू करने से पहले व्यापक तैयारी और उपभोक्ताओं को पर्याप्त जानकारी देने की मांग की।


E20 नीति पर बहस का आगाज़

हालांकि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में भीड़ सीमित थी, लेकिन इसने E20 नीति पर नई बहस को जन्म दिया है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ताओं की पसंद का सम्मान करने की मांग की। वहीं, सरकार का कहना है कि यह नीति देश के दीर्घकालिक ऊर्जा हितों, पर्यावरण संरक्षण और किसानों के लाभ के लिए बनाई गई है। ऐसे में E20 को लेकर तकनीकी, आर्थिक और उपभोक्ता हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी रहेगी।