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दिल्ली में इंडिया गठबंधन का शक्ति प्रदर्शन: 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली

दिल्ली में इंडिया गठबंधन ने 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली का आयोजन किया, जिसमें कांग्रेस और अन्य दलों ने भाग लिया। राहुल गांधी ने संविधान की महत्ता पर जोर दिया और 2024 के चुनाव को अवैध बताया। रैली में लगभग पांच लाख लोगों की उपस्थिति रही, जो विपक्ष के लिए नई ऊर्जा का संचार करेगी। जानें इस रैली की मुख्य बातें और इसके राजनीतिक प्रभाव के बारे में।
 

इंडिया गठबंधन की रैली का आयोजन

एक नवंबर को इंडिया गठबंधन ने दिल्ली में एक महत्वपूर्ण शक्ति प्रदर्शन किया। ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली में कांग्रेस के नेतृत्व में एक दर्जन से अधिक राजनीतिक दल शामिल हुए। इस रैली का नेतृत्व कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता कर रहे थे।


विभिन्न दलों की भागीदारी

इस रैली में समाजवादी पार्टी, वामपंथी दलों जैसे सीपीआई, सीपीआई-एम, झारखंड मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय जनता दल के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सभी दलों के नेताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान किसी भी दल से बड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में पिछले कई वर्षों से चोरी हो रही है और 2024 का लोकसभा चुनाव अवैध है।


रैली का मार्ग और भीड़

कनॉट प्लेस से मिंटो रोड होते हुए रामलीला मैदान तक का रास्ता विपक्ष के नेताओं और कार्यकर्ताओं से भरा हुआ था। इस दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के झंडे और कार्यकर्ता सबसे अधिक दिखाई दिए।


'पांच लाख लोगों की उपस्थिति'

कांग्रेस ने पहले दावा किया था कि रैली में दस लाख लोग शामिल होंगे, लेकिन कार्यकर्ताओं का मानना है कि लगभग पांच लाख लोग उपस्थित थे। विपक्ष ने रैली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की और कहा कि देश में एसआईआर पर तुरंत रोक लगनी चाहिए, साथ ही चुनाव बैलेट पेपर से होने चाहिए।


कांग्रेस और सपा का योगदान

रैली को सफल बनाने के लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने दिल्ली और आसपास के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश आदि से लोगों को आमंत्रित किया। इसके अलावा, राष्ट्रीय जनता दल और वामपंथी दलों के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


रैली का प्रभाव

रामलीला मैदान में आयोजित 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली में आई भीड़ विपक्ष के लिए नई ऊर्जा का संचार करेगी, क्योंकि इसमें कार्यकर्ताओं से लेकर आम लोग शामिल हुए हैं, जिससे पार्टियों का मनोबल बढ़ेगा।