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दिल्ली में केजरीवाल परिवार को चुनाव आयोग का नोटिस: जानें पूरी जानकारी

दिल्ली में चुनाव आयोग ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के पांच सदस्यों को विशेष इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत नोटिस जारी किया है। इस नोटिस का उद्देश्य मतदाता रिकॉर्ड का सत्यापन करना है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उनके नाम अंतिम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इस प्रक्रिया में शामिल 33 लाख से अधिक मतदाताओं को भी नोटिस जारी किए गए हैं। जानें इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी।
 

केजरीवाल परिवार के सदस्यों का नाम नोटिस में शामिल


केजरीवाल परिवार को चुनाव आयोग का नोटिस: दिल्ली में विशेष इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत चुनाव आयोग ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के पांच सदस्यों के नाम नोटिस में शामिल किए हैं। इनमें उनकी पत्नी सुनीता, पिता गोविंद राम, मां गीता देवी और बेटे पुलकित केजरीवाल शामिल हैं। इन सभी के नाम Unmapped with Last SIR श्रेणी में दर्ज किए गए हैं, जिसका अर्थ है कि इनका मौजूदा रिकॉर्ड पिछली मतदाता सूची से मेल नहीं खा रहा है। यह जानकारी 19 सितंबर को चुनाव आयोग द्वारा जारी बूथवार नोटिस डेटा के बाद सामने आई।


SIR में 33 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस

दिल्ली में SIR के अंतर्गत ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 अगस्त को जारी की गई थी, जिसमें लगभग 97.54 लाख मतदाताओं के नाम शामिल हैं। हालांकि, लगभग 47.7 लाख नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं पाए गए। इसके अलावा, करीब 33.13 लाख मतदाताओं को नोटिस के लिए चिन्हित किया गया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 13,79,785 मतदाता No Mapping और 19,33,134 मतदाता Logical Discrepancies श्रेणी में हैं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं की बूथवार जानकारी भी सार्वजनिक की है।


नोटिस का अर्थ नाम कटना नहीं, मिलेगा अवसर

केजरीवाल परिवार के सदस्यों को Unmapped श्रेणी में नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं है कि उनके नाम अंतिम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। नोटिस प्रक्रिया का उद्देश्य संबंधित मतदाता से दस्तावेज और आवश्यक जानकारी लेकर रिकॉर्ड का सत्यापन करना है। SIR के दौरान जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां पाई गई हैं, उन्हें अपनी पात्रता साबित करने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है। दिल्ली में ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां 30 सितंबर तक दाखिल की जा सकती हैं।


SIR की पारदर्शिता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

दिल्ली SIR को लेकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर पारदर्शिता से जुड़े सवाल सुप्रीम कोर्ट में उठ चुके हैं। याचिकाकर्ताओं ने नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं के नाम और उन्हें नोटिस दिए जाने के कारणों को सार्वजनिक करने की मांग की है। याचिका में Logical Discrepancies जैसी श्रेणियों में मतदाताओं को शामिल करने के आधार और प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी गई है। 19 सितंबर को दिल्ली CEO द्वारा नोटिस का बूथवार डेटा सार्वजनिक किया गया है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 22 सितंबर को सुनवाई प्रस्तावित है।