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दिल्ली में कॉल सेंटर से अमेरिका के नागरिकों के साथ 100 करोड़ रुपये की ठगी का मामला

दिल्ली में एक कॉल सेंटर से अमेरिका के नागरिकों के साथ 100 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय ने खानपुर क्षेत्र में छापेमारी की, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। ठग माइक्रोसॉफ्ट जैसे बड़े नामों का सहारा लेकर पायरेटेड सॉफ्टवेयर बेचते थे। यह गिरोह 2016 से सक्रिय था और अब ईडी इस मामले की गहराई से जांच कर रहा है। जानें इस ठगी के पीछे की कहानी और कैसे यह गिरोह काम करता था।
 

दिल्ली में ठगी का खुलासा

अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ विवाद के बीच, दिल्ली में एक कॉल सेंटर से 100 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने खानपुर क्षेत्र में तीन कॉल सेंटर्स पर छापेमारी की, जिससे यह मामला उजागर हुआ। ईडी ने गुरुवार की रात 10:30 बजे से तलाशी अभियान शुरू किया, जो अभी भी जारी है। इस कार्रवाई में 100 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा का लेनदेन भी पकड़ा गया है। हालांकि, हिरासत में लिए गए व्यक्तियों की संख्या और नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।


ठगी का तरीका

ईडी के अनुसार, ठग विशेष रूप से अमेरिका के नागरिकों को अपना शिकार बनाते थे। वे माइक्रोसॉफ्ट और विंडोज जैसी प्रमुख कंपनियों के असली सॉफ्टवेयर के नाम पर पायरेटेड सॉफ्टवेयर बेचते थे।


2016 से चल रहा था यह गिरोह

जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह 2016 से सक्रिय था। इस दौरान, आरोपियों के पास से 100 करोड़ रुपये की विदेशी ऑनलाइन लेनदेन का पता चला है। ईडी अब धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत इस राशि और उसके स्रोत की जांच कर रहा है।


अमेरिका कनेक्शन का खुलासा

जयपुर पुलिस ने 7 साल पहले एक मामले का खुलासा किया था, जिसमें एक गिरोह व्यक्ति की ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर इकट्ठा करता था। यह डेटा जुटाने के लिए अमेरिका की कंपनियों को रिश्वत देते थे। आरोपियों ने महारानी फार्म में एक कॉल सेंटर खोला था और ईमेल के माध्यम से लोन की किश्तों और जल्दी पैसे कमाने के ऑफर भेजते थे। इस मामले में आरोपी नितिन को गिरफ्तार किया गया था।