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दिल्ली में जंतर मंतर का विरोध स्थल से हटना: नए स्थानों की घोषणा

दिल्ली का जंतर मंतर, जो कई महत्वपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का गवाह रहा है, अब आधिकारिक विरोध स्थल की सूची से हटा दिया गया है। नए स्थानों में रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान, और सीबीडी ग्राउंड शामिल हैं। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब जंतर मंतर पर 2016 के बाद से सबसे अधिक प्रदर्शन हुए हैं। जानें इन नए स्थलों की दूरी और प्रदर्शनकारियों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में।
 

दिल्ली का जंतर मंतर: एक महत्वपूर्ण विरोध स्थल

दिल्ली का जंतर मंतर इस वर्ष कई कारणों से चर्चा में रहा है। चाहे वह पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन हो या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहा विरोध, इस स्थान पर विभिन्न मुद्दों पर लोग एकत्र हुए। हाल ही में, दिल्ली पुलिस के निर्देशों और केंद्र सरकार के निर्णय के बाद, जंतर मंतर को आधिकारिक विरोध स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। इसका मतलब है कि अब वहां पहले की तरह धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी।


नए विरोध स्थलों की घोषणा

जंतर मंतर के स्थान पर दिल्ली में धरना-प्रदर्शन के लिए तीन नए वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए गए हैं: रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान, और सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट (सीबीडी) ग्राउंड। यह निर्णय तब लिया गया है जब जंतर मंतर पर 2016 के बाद से सबसे अधिक विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं।


जंतर मंतर की भौगोलिक स्थिति

दिल्ली का जंतर मंतर संसद भवन से लगभग 1.5 से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जबकि नए धरना स्थलों की दूरी काफी अधिक है। बुराड़ी मैदान संसद भवन से लगभग 22 किलोमीटर, रामलीला मैदान 5 किलोमीटर, और सीबीडी ग्राउंड 13 किलोमीटर दूर है।


विरोध प्रदर्शनों की संख्या

जंतर मंतर पर पिछले एक दशक में 600 से अधिक विरोध प्रदर्शन हुए हैं। 2026 में अब तक यहां 80 से अधिक प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं, जो 2016 के बाद से किसी एक वर्ष में सबसे अधिक संख्या है। ये आंकड़े आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा (ACLED) के विश्लेषण पर आधारित हैं।


2026 के प्रमुख प्रदर्शन

इस वर्ष 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा आयोजित जून और अक्टूबर के प्रदर्शनों ने काफी ध्यान आकर्षित किया। इन प्रदर्शनों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई। जंतर मंतर ने कई अन्य महत्वपूर्ण प्रदर्शनों का भी गवाह बना है, जैसे 2012 में निर्भया केस के खिलाफ प्रदर्शन।


नए धरना स्थलों पर उठते सवाल

नए धरना स्थलों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, खासकर उनकी दूरी के कारण। कई नेताओं और लोगों का मानना है कि इन स्थानों पर प्रदर्शन करने से लोगों की पहुंच कम हो जाएगी। इसके अलावा, यहां इकट्ठा होने के लिए पहले से जगह बुक करनी पड़ती है, जिसके लिए शुल्क भी देना होता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रामलीला मैदान या सीबीडी ग्राउंड में विरोध प्रदर्शन का खर्च एक लाख रुपये प्रतिदिन से अधिक हो सकता है।