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दिल्ली में टोल विवाद: स्थानीय लोगों का आक्रोश बढ़ा

दिल्ली में यूईआर-2 पर बने पहले और महंगे टोल को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। 11 दिन पहले शुरू हुए इस टोल के कारण लोग इसे उपयोग करने से बच रहे हैं, जिससे आसपास के गांवों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। स्थानीय नेताओं ने इस मुद्दे को उठाते हुए समाधान की मांग की है। सांसदों का कहना है कि यह टोल दिल्लीवासियों के लिए जीवन रेखा है, और इसे बोझ नहीं बनाना चाहिए। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ।
 

दिल्ली में टोल विवाद की शुरुआत

दिल्ली टोल विवाद: दिल्ली में यूईआर-2 पर स्थापित पहले और सबसे महंगे टोल को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। लोगों में इस टोल के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। यूईआर-2 का संचालन 11 दिन पहले शुरू हुआ था, लेकिन इसका प्रभाव लोगों पर विपरीत पड़ रहा है। लोग इसे उपयोग करने से बच रहे हैं, क्योंकि चार किलोमीटर के लिए लगने वाला टोल टैक्स बहुत अधिक है। आसपास के कई गांवों पर इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है। मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा के कारण लोग इस मार्ग का उपयोग करने से पहले कई बार सोचते हैं। अगर कोई इसका उपयोग कर भी रहा है, तो वह केवल आपात स्थिति में।


टोल से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग

लोग टोल से बचने के लिए गांवों के संपर्क मार्गों का सहारा ले रहे हैं। रानीखेड़ा गांव के कई निवासी रोजाना द्वारका, नजफगढ़ मंडी और कापसहेड़ा डीएम ऑफिस जाने के लिए मजबूर हैं। लेकिन टोल के कारण उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।


राजनीतिक प्रतिक्रिया और समाधान की मांग

राजनीति में उबाल, समाधान की उम्मीद

स्थानीय लोगों का विरोध अब राजनीतिक रूप ले चुका है। उत्तर-पश्चिम दिल्ली के सांसद योगेंद्र चांदोलिया, पश्चिमी दिल्ली की सांसद कमलजीत सहरावत, मुंडका के विधायक गजेंद्र दराल और मटियाला के विधायक संदीप सहरावत ने केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा से इस मुद्दे पर चर्चा की। नेताओं ने स्पष्ट किया कि स्थानीय ग्रामीणों से भारी टोल वसूली अन्यायपूर्ण है और इसका समाधान जल्द होना चाहिए।


यूईआर-2 का महत्व और स्थानीय निवासियों की मांग

'यूईआर-2 दिल्लीवासियों के लिए जीवन रेखा'

सांसद योगेंद्र चांदोलिया ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यूईआर-2 दिल्लीवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, इसे बोझ नहीं बनाना चाहिए। वहीं, स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री ने इस हाईवे को उपहार के रूप में दिया था, लेकिन अब इसका लाभ मिलना कठिन हो गया है। लोग मांग कर रहे हैं कि या तो टोल को सीमा पर स्थानांतरित किया जाए या फिर ग्रामीणों को छूट दी जाए, ताकि वे बिना अतिरिक्त बोझ के अपनी दैनिक यात्रा कर सकें।