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दिल्ली में पार्कों के रखरखाव के लिए वित्तीय सहायता में वृद्धि का प्रस्ताव

दिल्ली सरकार ने पार्कों और उद्यानों के रखरखाव के लिए वित्तीय सहायता में वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में, यह पहल सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने और हरित क्षेत्र को मजबूत बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। प्रस्तावित बदलावों में रखरखाव सहायता को बढ़ाना और नए पार्कों के विकास के लिए एकमुश्त सहायता में वृद्धि शामिल है। यह कदम न केवल प्रदूषण नियंत्रण में मदद करेगा, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार भी लाएगा।
 

दिल्ली सरकार का हरित क्षेत्र को सशक्त बनाने का प्रयास

आरडब्ल्यूए, एनजीओ और सोसायटी को मिलेगा 100 प्रतिशत तक अनुदान


राजधानी के हरित क्षेत्र को मजबूत और टिकाऊ बनाना सरकार की प्राथमिकता: CM रेखा गुप्ता


रखरखाव मद में प्रति एकड़ सहायता 2.55 लाख से बढ़ाकर 3.8 लाख रुपये करने का प्रस्ताव


नए पार्कों के विकास और मौजूदा पार्कों के सुधार के लिए भी बढ़ेगी एकमुश्त सहायता


नई दिल्ली (समित मगन): दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के नेतृत्व में, दिल्ली सरकार ने राजधानी में हरित क्षेत्र को सशक्त बनाने और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए पार्कों और उद्यानों के लिए वित्तीय सहायता में महत्वपूर्ण संशोधन पर विचार किया है। दिल्ली पार्क्स एंड गार्डन्स सोसाइटी के माध्यम से आरडब्ल्यूए, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और पंजीकृत सोसायटियों को दी जाने वाली सहायता राशि में प्रस्तावित वृद्धि का उद्देश्य शहर के हरित स्थलों की गुणवत्ता और दीर्घकालिक संरक्षण को बेहतर बनाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से न केवल हरित आवरण का विस्तार होगा, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी और शहरी पर्यावरण में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।


रखरखाव सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि


मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि बढ़ती लागत और श्रमिकों की मजदूरी को ध्यान में रखते हुए, पार्कों और उद्यानों के रखरखाव के लिए दी जाने वाली वार्षिक सहायता को 2.55 लाख रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 3.8 लाख रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष करने का प्रस्ताव है। यह वृद्धि साफ-सफाई, सिंचाई, हरियाली के संरक्षण और समग्र रखरखाव को बेहतर बनाएगी।


100 प्रतिशत वित्तीय सहायता का प्रस्ताव


वर्तमान 90:10 के वित्तीय साझेदारी मॉडल को समाप्त कर 100 प्रतिशत सरकारी सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस व्यवस्था के तहत, सरकार कुल लागत का 90 प्रतिशत वहन करती थी, जबकि शेष 10 प्रतिशत आरडब्ल्यूए/संस्थाओं को देना पड़ता था। नए प्रस्ताव में इस मॉडल को समाप्त कर 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे सभी प्रकार की पात्र संस्थाओं को बिना किसी आर्थिक दबाव के योजना में शामिल होने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि शहर के अधिक से अधिक पार्कों और उद्यानों का बेहतर रखरखाव और विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा।


नए पार्कों के विकास के लिए बढ़ी सहायता


मुख्यमंत्री ने बताया कि नए पार्कों के निर्माण और विकास के लिए दी जाने वाली एकमुश्त सहायता को 1.0 लाख रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 2.9 लाख रुपये प्रति एकड़ करने का प्रस्ताव है। यह कदम तेजी से शहरीकरण के बीच हरित क्षेत्रों के संरक्षण और विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे राजधानी के विभिन्न इलाकों, विशेषकर नई विकसित कॉलोनियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में नए पार्कों के निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा।


उन्होंने कहा कि सुनियोजित हरित स्थल न केवल शहर की सौंदर्यात्मक पहचान को मजबूत करते हैं, बल्कि नागरिकों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। बढ़ती गर्मी, प्रदूषण और भागदौड़ भरी जीवनशैली के बीच पार्क लोगों को स्वच्छ हवा, सुकून भरा वातावरण और सामुदायिक जुड़ाव का अवसर प्रदान करते हैं।


मौजूदा पार्कों के सुधार के लिए अतिरिक्त प्रावधान


उन्होंने बताया कि सरकार मौजूदा पार्कों के उत्थान के लिए भी एकमुश्त वित्तीय सहायता देने पर विचार कर रही है। आरडब्ल्यूए और सोसायटियों की मांग के आधार पर डिस्प्ले बोर्ड, डस्टबिन और यूपीवीसी सिंचाई पाइपलाइन जैसी सुविधाओं के लिए 2.5 लाख रुपये प्रति एकड़ तक की सहायता प्रदान की जा सकती है। यह सहायता संबंधित संस्थाओं के अनुरोध पर उपलब्ध कराई जाएगी। विभाग का कहना है कि दिल्ली के पार्क और उद्यान अधिक स्वच्छ, सुव्यवस्थित और टिकाऊ बन सकेंगे। इससे नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक हरित स्थल उपलब्ध होंगे और पर्यावरणीय संतुलन को भी मजबूती मिलेगी।


मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि राजधानी में हरित क्षेत्र को मजबूत और टिकाऊ बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। किसी भी सार्वजनिक स्थल का दीर्घकालिक और प्रभावी रखरखाव तभी संभव है, जब उसमें समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो। इसी उद्देश्य से सरकार ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित कर रही है, जिनसे आरडब्ल्यूए और स्थानीय संस्थाएं अपने-अपने क्षेत्रों के पार्कों और उद्यानों की देखरेख में जिम्मेदारी के साथ सहभागिता निभा सकें। यह पहल ‘विकसित दिल्ली’ की परिकल्पना के अनुरूप है, जहां आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन और नागरिकों के जीवन स्तर को समान महत्व दिया जा रहा है।