दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति, राहत की कोई उम्मीद नहीं
दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर गंभीर
दिल्ली की हवा में प्रदूषण गंभीर श्रेणी में बरकरार, राहत की कोई उम्मीद नहीं
नई दिल्ली: हाल के दिनों में मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार, दिल्लीवासियों को उम्मीद थी कि नए साल की शुरुआत कुछ साफ हवा के साथ होगी। लेकिन, एक जनवरी को बारिश की कोई संभावना नहीं बनी और प्रदूषण का स्तर गंभीर बना रहा।
वातावरण में कोहरे के साथ प्रदूषण की मोटी परत बन गई है, जिससे दिनभर धुंधलापन छाया रहता है। इससे लोगों को आंखों में जलन और सांस के मरीजों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 380 दर्ज किया गया, जो कि बेहद खराब श्रेणी में आता है। यह बुधवार की तुलना में 7 अंक अधिक है।
एक सप्ताह तक प्रदूषण की स्थिति में सुधार की उम्मीद नहीं
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, रविवार तक हवा की गुणवत्ता बेहद खराब बनी रहेगी। इससे सांस के मरीजों को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है, साथ ही आंखों में जलन, खांसी और सिरदर्द जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि गंभीर वायु गुणवत्ता का मुख्य कारण मौसमी बदलाव है। तापमान में गिरावट के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है, और पश्चिमी विक्षोभ के चलते ठंडी हवा ऊपर नहीं उठ पा रही है। इस ठंडी हवा में वाहनों का धुआं और निर्माण कार्य से उत्पन्न धूल जमा हो जाती है।
सीएसई की रिपोर्ट में प्रदूषण के नए कारणों का खुलासा
दिल्ली की खतरनाक वायु गुणवत्ता के लिए पराली जलाने को मुख्य कारण माना जाता रहा है, लेकिन सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की एक नई रिपोर्ट ने इस धारणा को चुनौती दी है। रिपोर्ट के अनुसार, पराली जलाने का दौर खत्म होने के बाद भी दिसंबर में पीएम 2.5 का स्तर बढ़ गया। अध्ययन में अक्टूबर और नवंबर को 'अर्ली विंटर' के रूप में देखा गया है, जबकि दिसंबर को 'पोस्ट-फार्म फायर' चरण माना गया है।
दिसंबर में प्रदूषण की स्थिति और गंभीर
रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर में एनसीआर में फैला स्मॉग न केवल व्यापक था, बल्कि पराली जलाने के महीनों की तुलना में अधिक गंभीर रहा। यह भी स्पष्ट है कि दिल्ली की हवा में पीएम 2.5 का अधिकांश हिस्सा केवल राजधानी से नहीं आ रहा। 1 से 15 दिसंबर के बीच, दिल्ली का योगदान कुल पीएम 2.5 में केवल 35 प्रतिशत रहा, जबकि 65 प्रतिशत प्रदूषण आसपास के एनसीआर जिलों और अन्य क्षेत्रों से आया। यह दर्शाता है कि समस्या केवल स्थानीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्तर की है।