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दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए नए नियमों की घोषणा

दिल्ली में प्रदूषण की समस्या को नियंत्रित करने के लिए नए नियमों की घोषणा की गई है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने GRAP के स्टेज 4 और 5 में कई बदलाव किए हैं, जिसमें पुराने वाहनों पर पाबंदियाँ शामिल हैं। जानें कि ये नए नियम कैसे लागू होंगे और उनका नागरिकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
 

दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति

दिल्ली में अक्टूबर के पहले 12 दिन बीत चुके हैं, और हाल की बारिश ने कुछ राहत प्रदान की है। अन्यथा, प्रदूषण का स्तर पहले ही चिंताजनक स्थिति में पहुँच चुका था। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने दिल्ली-NCR में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं, जिसमें पराली जलाने और त्योहारों के दौरान पटाखों के उपयोग पर रोक लगाना शामिल है। प्रदूषण को कम करने के लिए ग्रेडेड एक्शन रिस्पांस प्लान (GRAP) के स्टेज 4 और 5 में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनका प्रभाव नागरिकों पर पड़ेगा.


GRAP के नए नियम

GRAP के स्टेज तीन और चार में BS-IV और उससे पुराने वाहनों को दी गई छूट समाप्त कर दी गई है। अब आवश्यक सामान ले जाने वाले वाहन भी इस पाबंदी से प्रभावित होंगे। स्टेज III में हल्के और मध्यम मालवाहक वाहनों की छूट हटा दी गई है, जबकि स्टेज IV में ट्रकों और भारी मालवाहक वाहनों पर भी पाबंदी लागू होगी.


GRAP की प्रक्रिया

GRAP एक योजना है जो दिल्ली-NCR में प्रदूषण के बढ़ने पर विभिन्न स्टेज में लागू होती है। जैसे-जैसे वायु गुणवत्ता खराब होती है, पाबंदियाँ सख्त होती जाती हैं। हर नए स्टेज में पिछले स्टेज की पाबंदियाँ भी लागू रहती हैं.


बड़ी गाड़ियों पर नए नियम

दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के लिए पुराने और धुआं छोड़ने वाले कमर्शियल वाहनों पर सख्त नियम लागू हैं। GRAP के स्टेज 3 और 4 के दौरान, दिल्ली में रजिस्टर्ड पुराने डीजल वाहनों की आवाजाही पर रोक लग जाती है। CAQM के नए नियमों के अनुसार, दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड कमर्शियल वाहनों के लिए BS-6 (डीजल), CNG, LNG या इलेक्ट्रिक होना अनिवार्य है.


BS मानक क्या हैं?

भारत स्टेज (BS) उत्सर्जन मानक हैं, जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए गए हैं। इनका उद्देश्य वाहनों के साइलेंसर से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करना है। BS-4 में इंजनों में इलेक्ट्रॉनिक फ्यूल इंजेक्शन और सल्फर की सीमा को 50 ppm तक लाया गया है, जबकि BS-6 में इसे घटाकर 10 ppm किया गया है.


सरकार की प्रदूषण नियंत्रण योजना

दिल्ली सरकार ने सर्दियों में बढ़ने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए एक स्थायी योजना बनाई है, जो 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक लागू रहेगी। इसमें धूल पैदा करने वाले निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी। सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारी घर से काम करेंगे, और पार्किंग चार्ज दोगुना किया जाएगा. इसके अलावा, बिना प्रदूषण सर्टिफिकेट वाले वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा.