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दिल्ली में बिजली दरों में वृद्धि की संभावना, सरकार को चुकाना है बड़ा बकाया

दिल्लीवासियों को अपने बिजली बिलों के लिए अधिक खर्च करने की संभावना है, क्योंकि दिल्ली सरकार को 30,000 करोड़ रुपये का बकाया चुकाना है। APTEL ने समय सीमा बढ़ाने की अपील को खारिज कर दिया है, जिससे बिजली दरों में वृद्धि की संभावना बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर सुधार नहीं किया गया, तो बिजली की आपूर्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। दिल्ली सरकार के बिजली मंत्री ने जनता को आश्वासन दिया है कि बढ़ी हुई दरों का असर नहीं पड़ेगा।
 

दिल्लीवासियों पर बढ़ सकता है बिजली का बोझ

दिल्ली के निवासियों को अब अपने घरों की बिजली के लिए अधिक खर्च करना पड़ सकता है। दिल्ली सरकार को अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) से एक महत्वपूर्ण झटका मिला है। APTEL ने दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) में अपील की थी कि 30,000 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान के लिए समय सीमा बढ़ाई जाए, लेकिन इस अपील को खारिज कर दिया गया है। इसका सीधा प्रभाव ग्राहकों पर पड़ सकता है।


बकाया भुगतान की जिम्मेदारी

दिल्ली सरकार को बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया चुकाना है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही सरकार को फटकार लगा चुका है। बकाया चुकाने की जिम्मेदारी दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन को दी गई है। पिछले साल अगस्त में, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वह तीन निजी डिस्कॉम (BRPL, BYPL और TPDDL) को 27,200 करोड़ रुपये का भुगतान करे, साथ ही ब्याज का भुगतान भी करना होगा।


सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल इस मामले में अपना निर्णय सुनाया था। कोर्ट ने दिल्ली की बिजली कंपनियों को यह बकाया राशि 7 वर्षों के भीतर वसूल करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद, प्रक्रिया में तेजी आई और इसकी जिम्मेदारी DERC को सौंपी गई।


क्या बढ़ेंगी बिजली दरें?

डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति को सुधारने और बिजली आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए, दिल्ली में बिजली की दरों में वृद्धि की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम आवश्यक हो सकता है। यदि समय पर सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में बिजली की आपूर्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। सरकार को बकाया चुकाना अनिवार्य होगा।


सरकार की चुनौती

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह बिना बिजली की दरों में वृद्धि किए बकाया चुकाए। दिल्ली में डिस्कॉम कंपनियां प्राइवेट हैं, इसलिए सरकार इसका बोझ सीधे नहीं उठा सकती। फाइनल रिकवरी बिलों या सरकारी सब्सिडी के माध्यम से की जा सकती है।


बिजली मंत्री का बयान

हाल ही में, दिल्ली सरकार के बिजली मंत्री आशीष सूद ने इस मुद्दे पर मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि हालिया निर्णय रेगुलेटरी बॉडी का है और दिल्ली सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि बिजली की बढ़ी हुई दरों का असर जनता पर न पड़े।