दिल्ली मेट्रो में मोबाइल नेटवर्क की समस्या: ट्राई की रिपोर्ट में खुलासा
नई दिल्ली में मोबाइल नेटवर्क की चुनौतियाँ
नई दिल्ली: दिल्ली मेट्रो में यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए मोबाइल नेटवर्क की समस्याएँ अब कोई नई बात नहीं रह गई हैं। सफर के दौरान कॉल का अचानक कट जाना, वीडियो कॉल का रुक जाना या इंटरनेट की धीमी गति आम हो गई है। हाल ही में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने इस मुद्दे पर एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसमें इस समस्या की जड़ें और कारणों का विश्लेषण किया गया है।
दिल्ली एनसीआर में ड्राइव टेस्ट का निष्कर्ष
ट्राई ने हाल ही में दिल्ली-एनसीआर के मेट्रो नेटवर्क और क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर पर एक व्यापक ड्राइव टेस्ट किया। इस परीक्षण में मोबाइल कॉलिंग, इंटरनेट स्पीड, सिग्नल की ताकत, कॉल ड्रॉप और डेटा सेवाओं की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया गया। रिपोर्ट में कई रूटों पर नेटवर्क कवरेज की कमी और कमजोर सिग्नल की समस्या उजागर हुई है।
कवरेज गैप की समस्या का विश्लेषण
रिपोर्ट में दिल्ली मेट्रो की विभिन्न लाइनों के साथ-साथ नोएडा, गुरुग्राम और दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर को भी शामिल किया गया। जांच में पाया गया कि कुछ स्थानों पर मोबाइल सिग्नल मानकों से नीचे चले जाते हैं, जिससे कॉलिंग और इंटरनेट सेवाएं प्रभावित होती हैं। इसे तकनीकी भाषा में 'कवरेज गैप' कहा जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क में कमजोर सिग्नल वाले कई स्थानों की पहचान की गई है। हालांकि, प्राइवेट कंपनियों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा, लेकिन नेटवर्क संबंधी चुनौतियाँ लगभग सभी ऑपरेटरों में किसी न किसी स्तर पर मौजूद पाई गईं।
समस्याओं के पीछे के कारण
जांच में यह भी सामने आया है कि दिल्ली मेट्रो का एक बड़ा हिस्सा अंडरग्राउंड रूट और तेज रफ्तार ट्रैकों से होकर गुजरता है। इस स्थिति में मोबाइल फोन को लगातार एक टावर से दूसरे टावर पर स्विच करना पड़ता है। यदि इस प्रक्रिया में कोई बाधा आती है, तो कॉल की गुणवत्ता और इंटरनेट कनेक्टिविटी पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे सिग्नल खो जाते हैं।
5जी नेटवर्क की स्थिति
हालांकि 5जी नेटवर्क ने डेटा स्पीड में सुधार किया है, लेकिन केवल तेज स्पीड ही पर्याप्त नहीं है। यात्रियों के लिए एक स्थिर और लगातार नेटवर्क की उपलब्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इस समस्या को हल करने के लिए विशेष नेटवर्क स्थापित करने की आवश्यकता है, जिसके लिए प्रयास जारी हैं। ट्राई की रिपोर्ट संबंधित टेलीकॉम कंपनियों को भेजी जा चुकी है, और उम्मीद है कि कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।