×

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2026: एबीवीपी की जीत और भविष्य की रणनीतियाँ

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2026 में एबीवीपी ने तीन महत्वपूर्ण पदों पर जीत हासिल की है। इस जीत के पीछे की रणनीतियों और छात्रों के मुद्दों पर एबीवीपी की योजनाओं पर चर्चा की गई है। आशीष चौहान ने बताया कि कैसे संगठन ने छात्रों के बीच अपनी जगह बनाई और भविष्य में वह किन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगा। जानें एबीवीपी की चुनौतियाँ और आगामी चुनावों के लिए उनकी रणनीतियाँ।
 

एबीवीपी की जीत का विश्लेषण

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के 2026 के चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सेंट्रल पैनल की चार में से तीन सीटें जीत लीं, जिसमें अध्यक्ष पद पर यश डबास, सचिव पद पर रिया छावड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह शामिल हैं। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दुपांशु शौकीन ने जीत हासिल की। कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई को इस बार कोई पद नहीं मिला।


इन परिणामों के बाद यह सवाल उठता है कि एबीवीपी ने अपने पिछले प्रदर्शन को कैसे बनाए रखा। एबीवीपी ने चुनाव जीतने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उसने छात्रों के बीच कैसे अपनी जगह बनाई।


एबीवीपी ने चुनाव प्रचार में सावधानी से टिकट वितरण और छात्रों की मूलभूत समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे विश्वविद्यालय के जेन-जी छात्र इस संगठन से जुड़ते गए। हालांकि, चुनाव जीतने के बाद भी छात्रों और पेपर लीक से संबंधित कई मुद्दे बने हुए हैं। ऐसे में एबीवीपी का आगे का क्या प्लान है और वह छात्रों के मुद्दों को कैसे उठाएगी? इसके साथ ही देशभर के विश्वविद्यालयों में आगामी चुनावों के लिए उसकी रणनीति क्या होगी?


इन सभी मुद्दों पर एबीवीपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने विस्तार से बातचीत की।


एबीवीपी की रणनीति और छात्र मुद्दे

प्रश्न: इस जीत के कारण क्या थे?


उत्तर: दिल्ली विश्वविद्यालय में 50 से अधिक कॉलेज और विभाग हैं, जहां छात्र संघ का चुनाव होता है। इस बार डूसू चुनाव में हॉस्टल, पीजी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। सत्य निकेतन की घटना के बाद ये मुद्दे छात्रों के बीच चर्चा का विषय बने।


दिल्ली-एनसीआर से आने वाले छात्रों की कनेक्टिविटी और लड़कियों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। इसके अलावा, छात्रों के लिए इंटर्नशिप और प्लेसमेंट के अवसर भी चर्चा में रहे। एबीवीपी ने इन मुद्दों को उठाकर छात्रों का समर्थन प्राप्त किया।



हमने नक्सल विचारधारा वाली अतिवादी लेफ्ट विचारधारा के खिलाफ भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। छात्रों ने राष्ट्रवाद और देशभक्ति की विचारधारा को समर्थन दिया, जिससे एबीवीपी को जीत मिली।


चुनौतियाँ और भविष्य की योजनाएँ

प्रश्न: क्या आप प्रदर्शन को चुनौती मानते हैं?


उत्तर: प्रदर्शन का मतलब यह नहीं है कि कोई संगठन हारेगा। छात्रों के बीच पेपर लीक की घटनाओं से नाराजगी थी, और हमने इस मुद्दे को उठाया। NEET पेपर लीक के मामले में हमने आंदोलन किया और छात्रों के हितों के लिए संघर्ष किया।



हमने विभिन्न राज्यों में छात्रों के मुद्दों को उठाया है और आगे भी उठाते रहेंगे। हम हमेशा रचनात्मक और शांतिपूर्ण तरीके से मुद्दों का समाधान निकालने का प्रयास करेंगे।


एबीवीपी की भविष्य की रणनीति

प्रश्न: आगे की रणनीति क्या होगी?


उत्तर: हम हर विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव लड़ते हैं। हमारे मुद्दे स्थानीय और राष्ट्रीय दोनों स्तर पर होते हैं। एबीवीपी एक स्वतंत्र संगठन है, जबकि अन्य छात्र संगठन राजनीतिक दलों से जुड़े हुए हैं।


हम छात्रों के मुद्दों को उठाते रहेंगे और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रयासरत रहेंगे।