दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव
दिल्ली सल्तनत का अध्याय हटाया गया
दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। अब उन्हें 'दिल्ली सल्तनत' से संबंधित अध्याय का अध्ययन नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि इसे पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है। यह अध्याय मध्य युगीन भारत के इतिहास से जुड़ा था, जिसमें दिल्ली सल्तनत की स्थापना, राजनीतिक व्यवस्था और सामाजिक परिवर्तन का विवरण था.
कौन से अध्याय हटाए गए?
एक रिपोर्ट के अनुसार, तीसरे सेमेस्टर से कई अन्य अध्याय भी हटाए गए हैं। इनमें 'हिस्ट्री ऑफ नॉर्थ इंडिया, 1400 से 1550 तक', 'जेंडर एंड विमेन इन अर्ली इंडिया' (1500 ईसा पूर्व से 1000 शताब्दी तक) और 'पॉलिटिकल प्रोसेस एंड स्ट्रक्चर ऑफ पॉलिटिक्स इन एंसिएंट इंडिया' शामिल हैं। इसके अलावा, 'रिलीजन एंड सोसाइटी इन एंसिएंट इंडियन लिट्रेचर' को भी पाठ्यक्रम से बाहर किया गया है. 7 अगस्त को जारी नोटिफिकेशन में इन बदलावों की जानकारी दी गई थी।
बदलाव का कारण
ये बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत किए जा रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय ने 2022-23 के लिए तैयार की गई नीति के अनुसार पाठ्यक्रम में संशोधन किया है।
नए बदलावों का प्रभाव
'दिल्ली सल्तनत' और 'हिस्ट्री ऑफ नॉर्थ इंडिया' में कई समानताएं हैं, जो अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में पढ़ाई जाती हैं। एक प्रोफेसर का कहना है कि पहले के अध्याय में मध्य युगीन भारत की जानकारी सीमित थी, जबकि दिल्ली सल्तनत में इस विषय पर अधिक विस्तार से चर्चा की गई थी.
विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि विशेषज्ञ समिति का उद्देश्य पाठ्यक्रम को भारतीय इतिहास के विभिन्न क्षेत्रों और कालखंडों का बेहतर प्रतिनिधित्व देना है। कुछ विभागीय सदस्यों का मानना है कि NEP के तहत कई सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रमों को हटाया जा रहा है। विभाग ने कुलपति को एक प्रस्ताव में चिंता व्यक्त की थी कि सत्र शुरू होने के बावजूद पाठ्यक्रम अधिसूचित नहीं होने से छात्रों को वैकल्पिक पेपर चुनने में कठिनाई हो रही थी.