☰
×

दिल्ली व्यापारियों ने कांग्रेस की रैली को दिवाली के बाद आयोजित करने की मांग की

दिल्ली के व्यापारियों ने कांग्रेस की एक नवंबर को होने वाली रैली को स्थगित करने की मांग की है। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने रैली के आयोजन पर विचार करने का आश्वासन दिया। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली से पहले रैली के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान हो सकता है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने खड़गे से निवेदन किया है कि रैली को दिवाली के बाद आयोजित किया जाए, ताकि व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
 

व्यापारियों की रैली स्थगित करने की अपील

नई दिल्ली: दिल्ली के व्यापारियों ने रामलीला मैदान में एक नवंबर को होने वाली कांग्रेस की रैली को स्थगित करने की मांग की है। उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उस बयान का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने इस निर्णय पर विचार करने का आश्वासन दिया। व्यापारियों का कहना है कि रैली को दिवाली के बाद आयोजित किया जाना चाहिए ताकि व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।


व्यापारियों को चिंता है कि दिवाली से पहले रैली के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान हो सकता है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि वे कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के साथ चर्चा के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेंगे।


चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने कहा, "खड़गे के इस बयान से व्यापारियों में उम्मीद जगी है। हम उनके संवेदनशील रवैये की सराहना करते हैं।"


सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा, "हमने खड़गे को पत्र लिखकर निवेदन किया है कि अगली बैठक में दिवाली के पीक सीजन को ध्यान में रखते हुए रैली को दिवाली के बाद आयोजित करने का निर्णय लें।"


व्यापारियों का कहना है कि इस साल धनतेरस 6 नवंबर को है, जिसके चलते दिल्ली में लगभग 25 हजार करोड़ का कारोबार होता है। इसके बाद दीपावली 8 नवंबर को और भैया दूज 10-11 नवंबर को है, जो पीक सीजन है।


रामलीला मैदान के आसपास 5 किलोमीटर के दायरे में 20 प्रमुख होलसेल और रिटेल बाजार हैं, जैसे चांदनी चौक, सदर बाजार, और करोल बाग। इन बाजारों में लगभग 3 लाख व्यापारी काम करते हैं, और उनके परिवारों को मिलाकर लगभग 15 लाख लोगों की आजीविका इनसे जुड़ी हुई है।


सीटीआई ने चेतावनी दी कि यदि 10 लाख लोगों की रैली होती है, तो इसका असर केवल रामलीला मैदान पर नहीं, बल्कि पूरे दिल्ली के बाजारों पर पड़ेगा। इससे पैनिक जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जैसा कि 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर हुआ था।


सीटीआई के चेयरमैन ने खड़गे से अनुरोध किया कि व्यापारियों के हित में रैली को दिवाली के बाद आयोजित किया जाए।